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ईरान युद्ध के बीच PM मोदी की ‘त्याग’ वाली अपील पर राहुल गांधी का तीखा हमला; “ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत हैं”

by Tarun Bhardwaj • May 11, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध और उससे उपजे वैश्विक आर्थिक संकट के बीच PM मोदी द्वारा देशवासियों से की गई ‘किफ़ायत’ की अपील ने देश में एक नई सियासी जंग छेड़ दी है। जहाँ पीएम मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोना न खरीदने और वर्क फ्रॉम होम जैसी सलाह दी है, वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे सरकार की विफलता करार दिया है।

पीएम मोदी की अपील

तेलंगाना के दौरे पर सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए PM मोदी ने युद्ध के कारण सप्लाई चेन पर पड़े असर का हवाला दिया। उन्होंने नागरिकों से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया। पीएम ने अपील की कि देशहित में अगले एक साल तक घरों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए सोने के गहने न खरीदे जाएं, ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके। उन्होंने पेट्रोल-डीजल कम जलाने, मेट्रो का उपयोग करने और खाने के तेल के इस्तेमाल में कमी करने को कहा।

कंपनियों से अपील की गई कि वे कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स को प्राथमिकता दें ताकि ईंधन की खपत कम हो।
PM मोदी ने बताया कि दुनिया में 3000 रुपये में बिकने वाली खाद की बोरी भारत सरकार किसानों को मात्र 300 रुपये में दे रही है, जिसका बोझ सरकार खुद उठा रही है।

राहुल गांधी का पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई किफ़ायत की अपील पर पलटवार करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने पीएम के सुझावों को उपदेश के बजाय सरकार की नाकामी का सबूत करार देते हुए कहा कि 12 साल के शासन के बाद देश ऐसे मुकाम पर पहुँच गया है जहाँ जनता को यह बताया जा रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहाँ जाना चाहिए।

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी आर्थिक विफलताओं की जिम्मेदारी बार-बार जनता पर डाल देती है ताकि खुद की जवाबदेही से बचा जा सके। राहुल गांधी ने अंत में कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जनता से ‘त्याग’ की मांग करना यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है और देश चलाना अब वर्तमान प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं रही।

युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल और फर्टिलाइजर के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छू रहे हैं। भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसके लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। पीएम के अनुसार, इन ‘त्याग’ भरे कदमों से देश के खजाने का स्वास्थ्य सुधरेगा।

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