नई दिल्ली। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर बढ़ते तनाव के बीच आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे 2 दिन के लद्दाख दौरे पर हैं। वे सीमा पर सुरक्षा इंतजामों को परखेंगे। इस बीच उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में बॉर्डर पर चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जाहिर की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और हर खतरे से निपटने में सक्षम है। इस बीच भारत ने भी बॉर्डर पर सैन्य सामान और सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। पहली तस्वीर लद्दाख की है। यहां भारतीय सेना ने चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ लद्दाख सेक्टर में पहली K9-वज्र स्व-चालित हॉवित्जर रेजिमेंट को तैनात किया है। यह बंदूक लगभग 50 किमी की दूरी पर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकती है। https://twitter.com/ANI/status/1444174378992685063?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1444174378992685063%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fstatic.asianetnews.com%2Ftwitter-iframe%2Fshow.html%3Furl%3Dhttps%3A%2F%2Ftwitter.com%2FANI%2Fstatus%2F1444174378992685063%3Fref_src%3Dtwsrc5Etfw आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने कहा-चीनियों ने हमारे पूर्वी कमान तक पूरे पूर्वी लद्दाख और उत्तरी मोर्चे पर काफी संख्या में तैनाती की है। निश्चित रूप से अग्रिम क्षेत्रों में उनकी तैनाती में वृद्धि हुई है, जो हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आर्मी चीफ ने कहा-हम चीन की सभी गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हमें जो जानकारियां मिल रही हैं, उसके हिसाब से हम अपने बुनियादी ढांचे के साथ सैनिकों के मामले में भी डेवलमेंट्स कर रहे हैं। ये किसी भी खतरे का मुकाबला करने के लिए आवश्यक हैं। फिलहाल, हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आर्मी चीफ ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की तरफ से हाल में घुसपैठ में वृद्धि हुई है, जो संघर्षविराम के विरुद्ध हैं। पिछले 10 दिनों में 2 संघर्ष विराम के तोड़े गए हैं। फरवरी के पहले की स्थिति वापस आ चुकी है। आर्मी चीफ ने चीन के बारे में कहा कि पिछले 6 महीनों में स्थिति काफी सामान्य रही है। हमें उम्मीद है कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 13वें दौर की वार्ता होगी और हम इस बात पर आम सहमति पर पहुंचेंगे कि इस जगह से पीछे कैसे हटेंगे। मुझे उम्मीद है कि हम रिजल्ट हासिल करने में सक्षम होंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि हम अपने मतभेदों को बातचीत के जरिये धीरे-धीरे सुलझा लेंगे।