Fri, Jun 5th, 2026
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दिल्ली में औसत एक्यूआई 413 के साथ हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंची, आनंद विहार और मुंडका में पारा 466 के करीब

by Tarun Bhardwaj • December 23, 2025
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यूनिक समय, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में स्थानीय प्रतिकूल कारकों और हवा की धीमी गति ने प्रदूषण के स्तर को भयावह बना दिया है। लगातार सात दिनों तक हवा के ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रहने के बाद मंगलवार को हालात और बिगड़ गए और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) आधिकारिक तौर पर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। सुबह की शुरुआत कोहरे और धुंध की एक ऐसी घनी चादर के साथ हुई जिसने पूरी दिल्ली को अपनी आगोश में ले लिया। आसमान में स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जिसके कारण एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम ने मंगलवार सुबह दिल्ली का औसत एक्यूआई 413 मापा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक आनंद विहार 466 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित इलाका रहा, जबकि मुंडका, जहांगीरपुरी और अशोक विहार जैसे क्षेत्रों में भी प्रदूषण का स्तर 440 के पार बना हुआ है।

दिसंबर का महीना दिल्लीवासियों के लिए स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है क्योंकि इस पूरे महीने में अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं बीता जब एक्यूआई 200 से नीचे रहा हो। इसका अर्थ यह है कि इस साल दिल्ली की जनता को एक दिन के लिए भी ‘मध्यम’ श्रेणी की हवा नसीब नहीं हुई है। पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति कहीं अधिक चिंताजनक है क्योंकि दिसंबर 2024 में कम से कम आठ दिन ऐसे थे जब हवा 200 से नीचे यानी संतोषजनक स्थिति में थी। इस साल 11 दिसंबर के बाद से प्रदूषण लगातार रेड जोन में बना हुआ है और बीच में मिली महज दो दिनों की मामूली राहत के अलावा दिल्ली की हवा लगातार ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी के बीच झूल रही है। सीपीसीबी के मानकों के अनुसार 401 से 500 के बीच की रीडिंग ‘गंभीर’ मानी जाती है, जो स्वस्थ लोगों पर भी बुरा असर डालती है।

प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर ने न केवल दृश्यता कम कर दी है बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इसे लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जहांगीरपुरी में 447, वजीरपुर में 440 और आईटीओ में 436 एक्यूआई दर्ज किया गया है, जो सीधे तौर पर फेफड़ों और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाता है। स्मॉग की यह स्थिति हवा की गति रुकने के कारण पैदा हुई है, जिससे प्रदूषित कण वातावरण में ही फंस कर रह गए हैं। प्रशासन द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत कड़े कदम उठाए जाने की संभावना बढ़ गई है ताकि प्रदूषण के इस जानलेवा स्तर को नियंत्रित किया जा सके और लोगों को जहरीली हवा से कुछ राहत मिल सके।

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