Mon, Jun 15th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

फेफड़ों की इस गंभीर बीमारी से हुआ महान तबला वादक जाकिर हुसैन का निधन

by Tarun Bhardwaj • December 17, 2024
Advertisement
Ad

यूनिक समय ,नई दिल्ली। मशहूर तबला वादक और पद्म विभूषण से सम्मानित जाकिर हुसैन का सोमवार को निधन हो गया। इस खबर ने दुनियाभर में उनके प्रशंसकों को गमगीन कर दिया। परिवार की तरफ से साझा की गई जानकारियों के मुताबिक वह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अस्पताल में भर्ती थे। वह लंबे समय से इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Idiopathic pulmonary fibrosis) नामक बीमारी और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं से पीड़ित थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह पिछले दो सप्ताह से अस्पताल में थे , जहां उनकी हालत बिगड़ने के बाद आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। सोमवार को देश के इस महान सितारे ने आखिरी सांस ली।

इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (आईपीएफ) फेफड़ों में होने वाली एक क्रोनिक बीमारी है जिसके कारण समय के साथ सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है और कई अन्य प्रकार की जटिलताएं होने लगती हैं। इस बीमारी के कारण फेफड़ों में स्कार टिशू (फाइब्रोसिस) बनने होने लगता है जिस वजह आपके फेफड़े रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन को प्रभावी ढंग पहुंचाने में कठिनाई महसूस करते हैं।

डॉक्टर कहते हैं, फेफड़ों की ये बीमारी किसी को भी हो सकती है इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करना और बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।

महान तबला वादक की मौत जिस इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस बीमारी के कारण हुई है, वह 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में बहुत आम है। ये इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) का एक प्रकार है जिसकी वजह से फेफड़ों के ऊतक मोटे होने लगते हैं और इनमें फाइब्रोसिस की दिक्कत हो सकती है।

फाइब्रोसिस के कारण रक्त प्रवाह में ऑक्सीजन रिलीज करना और शरीर के बाकी हिस्सों में पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाना फेफड़ों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आनुवांशिकता और दिनचर्या से संबंधित कारक इस बीमारी की वजह हो सकते हैं।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को फेफड़ों की गंभीर बीमारी रही हो उन्हें विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन के मुताबिक इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के मुख्यरूप से दो लक्षण होते हैं जिनपर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

1. लंबे समय तक सूखी खांसी बने रहना- आईपीएफ वाले अधिकांश लोगों को 8 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहती है।
2. अक्सर सांस फूलना- अगर आपको अक्सर सांस फूलने की दिक्कत रहती है तो ये अलार्मिंग है। जैसे-जैसे फाइब्रोसिस की दिक्कत बढ़ती जाती है आपको आराम करते समय भी सांस लेने में कठिनाई का अनुभव हो सकता है।

इन लक्षणों के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अक्सर थकान बने रहने, ऊर्जा की कमी महसूस होना और बिना स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी इस बीमारी की संकेत हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कई मामलों में डॉक्टर यह पता नहीं लगा पाते हैं कि व्यक्ति को ये बीमारी क्यों हुई है। जब बीमारी का कारण पता नहीं चलता है, तो फाइब्रोसिस को “इडियोपैथिक” कहा जा सकता है। जाकिर हुसैन को भी इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या थी, जिसका मतलब है कि डॉक्टरों को उनमें बीमारी का स्पष्ट कारण पता नहीं था।

अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों में इस बीमारी की फैमिली हिस्ट्री रही है या जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें आईपीएफ होने का जोखिम अधिक देखा जाता है। इसके अलावा वायरल संक्रमण, वायु प्रदूषण जैसी स्थितियां भी इसे बढ़ावा दे सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान फेफड़ों की कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है इसलिए इससे दूरी बनाना सबसे जरूरी है।

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.