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चलती ट्रेन के सैलून कोच में रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ पर मचा बवाल; वीडियो वायरल होने पर रेलवे ने दी सफाई

by Tarun Bhardwaj • July 13, 2026
Uproar over Rudrabhishek and religious rituals performed in the saloon coach of a moving train

चलती ट्रेन के सैलून कोच में रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ पर मचा बवाल; वीडियो वायरल होने पर रेलवे ने दी सफाई

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यूनिक समय, नई दिल्ली। चलती ट्रेन के फर्स्ट क्लास कूपे को ‘हनीमून कूपे’ की तरह सजाने का विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि भारतीय रेलवे में एक और नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक वीआईपी सैलून कोच (Saloon Coach) के अंदर पंडितों को बुलाकर चलती ट्रेन में बाकायदा तामझाम फैलाकर रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ कराया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर यूजर्स ने रेलवे के नियमों और निष्पक्षता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विवाद को बढ़ता देख पश्चिम रेलवे (Western Railway) ने तत्काल इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है और नियमों का ब्योरा दिया है।

सोशल मीडिया पर यूजर ने उठाए सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर ‘सोशलिस्ट स्पिरिट’ नामक एक हैंडल से यूजर ने इस घटना का वीडियो पोस्ट करते हुए रेलवे को आड़े हाथों लिया। यूजर ने लिखा, “ट्रेन में नमाज पढ़ने पर भावनाएं आहत हो जाती हैं और केबिन में हनीमून का सरप्राइज देने पर संस्कृति खतरे में आ जाती है, जिसके कारण टीटीई (TTE) तक सस्पेंड हो जाता है। लेकिन जब भारतीय रेलवे के एक वीआईपी सैलून कोच के अंदर चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ किया जाता है, तब सारे नियम-कायदे और समाज का विरोध कहां चला जाता है?” इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई।

रेलवे की सफाई

मामले के तूल पकड़ने पर पश्चिम रेलवे ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सिरे से खारिज कर दिया। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह कोई सरकारी या वीआईपी को अलॉट किया गया सैलून नहीं था। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, IRCTC के माध्यम से 8 जुलाई, 2026 को एक निजी संस्था द्वारा यह सैलून कार बुक की गई थी, जिसके लिए पार्टी ने कमर्शियल बुकिंग के तौर पर ₹3,08,580 का एडवांस भुगतान किया था।

इस सैलून कार को 10 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली (NDLS) से मुंबई (BDTS) की एकतरफा यात्रा के लिए ट्रेन संख्या 12926 पश्चिम एक्सप्रेस में जोड़ा जाना था। उत्तरी रेलवे (NR) ने ऑपरेशनल व्यवहार्यता को देखते हुए इसका नोटिफिकेशन जारी किया था। रेलवे ने साफ कहा कि यह विशुद्ध रूप से एक प्राइवेट कमर्शियल बुकिंग थी, इसलिए इसे सरकारी दफ्तर या अथॉरिटी का वीआईपी सैलून बताना तथ्यों के हिसाब से बिल्कुल गलत है। यात्रा के दौरान कोई भी हताहत या असहज स्थिति पैदा नहीं हुई।

क्या कहते हैं रेलवे के नियम?

रेलवे अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोई भी आम नागरिक या निजी संस्था IRCTC की एफटीआर (Full Tariff Rate) सेवा के तहत पूरा सैलून कोच अपने निजी इस्तेमाल के लिए किराए पर ले सकती है, जिसमें अपनी आस्था के अनुसार अनुष्ठान करने पर रेलवे के नियमों में कोई स्पष्ट मनाही नहीं है। हालांकि, इसके लिए कुछ सख्त शर्तें लागू होती हैं, जैसे कि अनुष्ठान के दौरान ट्रेन की यात्रा में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। चूंकि यह एक अलग कोच होता है, इसलिए बाहर के सह-यात्रियों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए, साथ ही आग के खतरे को देखते हुए कोच के भीतर किसी भी ज्वलनशील सामग्री, हवन सामग्री या खुली आग के इस्तेमाल की सख्त मनाही होती है। इसके अलावा, बुकिंग के समय किसी भी संभावित नुकसान या पेनल्टी की भरपाई के लिए एक रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट और रजिस्ट्रेशन चार्ज देना अनिवार्य होता है।

आखिर क्या होता है सैलून कोच?

रेलवे का सैलून कोच चलती ट्रेन में ‘पटरी पर दौड़ते आलीशान घर’ जैसा होता है, जहाँ IRCTC टूरिज्म के तहत बुक होने वाले इन सैलून कारों में यात्रियों को बेहद लक्जरी और वीआईपी सुविधाएं मिलती हैं। इस खास कोच के भीतर स्नानघर (अटैच्ड बाथरूम) के साथ दो आलीशान शयनकक्ष होते हैं, जबकि अतिरिक्त लोगों को ठहराने के लिए 4 से 6 बर्थ या बेड भी दिए जाते हैं। यह कोच उन लोगों, परिवारों या नवविवाहित जोड़ों के लिए एक आदर्श विकल्प है जो यात्रा के दौरान पूर्ण गोपनीयता (Privacy) और विशिष्टता चाहते हैं, क्योंकि इसमें सफर के दौरान कॉरपोरेट बैठकें आयोजित करने के लिए सोफे और कुर्सियों के साथ एक विशाल वातानुकूलित लिविंग-कम-डाइनिंग रूम भी मिलता है।

इसके अलावा, सैलून के भीतर एक पर्सनल किचन होता है जिसमें आवश्यक बर्तन, गर्म पानी का सिंक, रेफ्रिजरेटर और आरओ (RO) शुद्ध पानी की सुविधा मौजूद होती है, और यात्रियों की आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे की तरफ से एक एसी अटेंडेंट व एक जनरल अटेंडेंट चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं तथा अतिरिक्त शुल्क पर IRCTC रसोइया (कुक) और खाना पकाने की सामग्री भी उपलब्ध कराती है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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