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World: किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया को निशाना बनाने की तैयारी; सीमा पर तैनात कर रहा है नई तोप प्रणालियां

by Tarun Bhardwaj • May 8, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की रही-सही उम्मीदें अब धुएँ में मिलती नजर आ रही हैं। उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन ने सीधे तौर पर दक्षिण कोरिया को दहलाने की तैयारी कर ली है। शुक्रवार को उत्तर कोरिया ने आधिकारिक घोषणा की कि वह अपनी सीमा पर ऐसी लंबी दूरी की तोप प्रणालियां तैनात कर रहा है, जो दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल और उसके आस-पास के क्षेत्रों को पल भर में राख करने की क्षमता रखती हैं।

सियोल पर ‘सीधा निशाना’

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, किम जोंग उन ने हाल ही में एक प्रमुख हथियार फैक्ट्री का गुप्त दौरा किया। यहाँ उन्होंने 155 मिलीमीटर की नई ऑटोमैटिक तोप-होवित्जर के उत्पादन का बारीकी से निरीक्षण किया। इन तोपों की मारक क्षमता 60 किलोमीटर से भी अधिक है, जिसका अर्थ है कि सीमा पर तैनात होते ही दक्षिण कोरिया का सबसे व्यस्त राजधानी क्षेत्र इनकी सीधी रेंज में आ जाएगा। किम ने स्पष्ट किया कि ये तोपें इसी साल दक्षिणी सीमा पर तैनात की जाएंगी, जिससे उत्तर कोरिया की जमीनी सैन्य ताकत और ‘ऑपरेशनल प्रभावशीलता’ कई गुना बढ़ जाएगी।

समुद्र में भी बढ़ेगी ताकत

सिर्फ जमीन ही नहीं, उत्तर कोरिया अब समंदर में भी अपनी धमक बढ़ाने जा रहा है। किम जोंग उन ने पश्चिमी तट पर नए विध्वंसक पोत (Destroyer) ‘चो ह्योन’ की समीक्षा की।
सभी परीक्षणों के सफल होने के बाद किम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जून के मध्य तक इस घातक पोत को नौसेना की सेवा में शामिल कर लिया जाए। इस दौरान किम की बेटी भी उनके साथ नजर आईं, जिसे दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियां किम के भविष्य के उत्तराधिकारी के तौर पर देख रही हैं।

रिश्तों का अंत

6 मई को दक्षिण कोरिया द्वारा किए गए खुलासे ने दुनिया को चौंका दिया था। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान से कोरियाई एकीकरण से जुड़े सभी संदर्भ हटा दिए हैं। किम जोंग उन की रणनीति अब ‘शांतिपूर्ण पुनर्मिलन’ की नहीं, बल्कि ‘दो अलग और दुश्मन राष्ट्रों’ की है। किम का संदेश साफ है— “हम आपस में दुश्मन हैं, न तुम हमारी जमीन छुओ, न हम तुम्हारी।”

किम ने संकेत दिया है कि सीमा पर केवल तोपें ही नहीं, बल्कि शक्तिशाली मल्टी-रॉकेट लॉन्च सिस्टम और आधुनिक मिसाइल प्रणालियां भी तैनात की जा रही हैं। यह सैन्य जमावड़ा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य सहयोग बढ़ रहा है, जिसे उत्तर कोरिया अपने लिए सीधा खतरा मानता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह आक्रामक रुख कोरियाई प्रायद्वीप को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े युद्ध का रूप ले सकती है।

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