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World: शेख हसीना को ढाका कोर्ट से करारा झटका; प्लॉट धोखाधड़ी के 3 केस में 21 साल की जेल की सज़ा सुनाई

by Tarun Bhardwaj • November 27, 2025
शेख हसीना को ढाका कोर्ट से करारा झटका

World: शेख हसीना को ढाका कोर्ट से करारा झटका; प्लॉट धोखाधड़ी के 3 केस में 21 साल की जेल की सज़ा सुनाई

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यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को गुरुवार को ढाका कोर्ट से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश मोहम्मद अब्दुल्लाह अल मामून की अदालत ने प्लॉट धोखाधड़ी के तीन अलग-अलग मामलों में उन्हें प्रत्येक केस में सात-सात साल की सजा सुनाई है, जिससे कुल सजा 21 साल की कैद हो जाती है। यह फैसला हसीना के 15 साल के लंबे राजनीतिक करियर पर एक बड़ा धब्बा है।

भ्रष्टाचार के आरोप और सज़ा

यह मामला पुर्बाचल न्यू सिटी प्रोजेक्ट (Purbachal Plot Scam) में सरकारी जमीनों के कथित गैर-कानूनी आवंटन से जुड़ा है। बांग्लादेश के भ्रष्टाचार रोकथाम आयोग (ACC) ने जनवरी 2025 में हसीना और उनके परिवार के खिलाफ छह केस दर्ज किए थे, जिनमें ढाका के पुर्बाचल इलाके में 30 कट्ठा सरकारी जमीन का बिना आवेदन किए आवंटन करने का आरोप है।

ढाका कोर्ट ने कहा कि यह आवंटन कानूनी सीमा से बाहर था। कुल 23 आरोपी थे, जिनमें हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय को पांच साल की सजा और एक लाख टाका का जुर्माना लगाया गया है, जबकि बेटी साइमा वाजेद पुतुल को भी पांच साल की कैद मिली है। बाकी तीन मामलों का फैसला एक दिसंबर को आएगा।

फरार हसीना और अन्य कानूनी मामले

जुलाई 2024 के बड़े छात्र विद्रोह के बाद हसीना 5 अगस्त को बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तभी से भारत में शरण लिए हुए हैं। चूंकि हसीना और उनका परिवार फरार है, इसलिए अदालत में उनकी तरफ से कोई वकील मौजूद नहीं था।

इससे पहले, बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई 2024 के छात्र आंदोलनों को कुचलने के लिए उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए अनुपस्थिति में मौत की सजा भी सुनाई थी।

भारत का रुख और राजनीतिक निहितार्थ

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि ढाका से हसीना के प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध मिला है और इसकी जांच चल रही है। जायसवाल ने जोर दिया कि भारत बांग्लादेश की स्थिरता, शांति और लोकतंत्र के हित में काम करेगा और सकारात्मक संवाद जारी रखेगा। बांग्लादेश में विपक्षी दलों ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है, जबकि हसीना के समर्थक इसे अन्याय करार दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये केस राजनीतिक बदले का रूप भी ले सकते हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाने का संकेत देते हैं।

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