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World: हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सब-कमेटी में ट्रंप प्रशासन का बड़ा खुलासा; भारत को बताया चीन के खिलाफ अनिवार्य स्तंभ

by Tarun Bhardwaj • February 12, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दक्षिण एशिया में अपनी विदेश नीति के पत्तों को खोलते हुए भारत को चीन के खिलाफ एक ‘अनिवार्य स्तंभ’ करार दिया है। बुधवार को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सब-कमेटी के सामने सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर ने स्पष्ट किया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए भारत का शक्तिशाली होना अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए सर्वोपरि है।

स्वतंत्र और सैन्य रूप से सशक्त भारत

पॉल कपूर ने अमेरिकी सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि एक आर्थिक और सैन्य रूप से आत्मनिर्भर भारत स्वाभाविक रूप से पूरे एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को सीमित करने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार भारत का निरंतर विकास अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति के संतुलन को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है। चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना के संदर्भ में उन्होंने तर्क दिया कि भारत का स्वतंत्र विकास बीजिंग की विस्तारवादी नीतियों के मार्ग में सबसे बड़े अवरोधक के रूप में कार्य करता है।

इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि भारत अब धीरे-धीरे रूस पर अपनी तेल निर्भरता को कम कर रहा है और अमेरिकी तेल की खरीद की दिशा में सक्रिय रूप से कदम बढ़ा रहा है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई और मजबूत दिशा मिलेगी।

पाकिस्तान: खनिज संसाधन और आतंकवाद पर सहयोग

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सब-कमेटी में भारत को रणनीतिक सहयोगी बताने के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के साथ भी अपने संबंधों को ‘जरूरी पार्टनर’ के रूप में परिभाषित किया है। पॉल कपूर ने बताया कि अमेरिका वर्तमान में पाकिस्तान के साथ उसके ‘क्रिटिकल मिनरल रिसोर्स’ (महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों) की क्षमता को समझने पर काम कर रहा है। साथ ही कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है।

कपूर ने साफ किया कि काउंटर-टेररिज्म के मोर्चे पर सहयोग जारी है, जो पाकिस्तान को उसके आंतरिक सुरक्षा खतरों से लड़ने में मदद कर रहा है। हालांकि, अमेरिका में शरिया कानून लागू करने वाले चरमपंथी समूहों की मौजूदगी पर उन्होंने कहा कि संगठित रूप से ऐसी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

ट्रंप की ‘मध्यस्थता’ पर विवाद

सुनवाई के दौरान पिछले साल मई में हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का मुद्दा भी गरमाया। डेमोक्रेटिक सांसद सिडनी कैमलेजर-डोव ने इस संकट के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका की तीखी आलोचना की। डोव ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की सीजफायर का श्रेय लेने की होड़ और कश्मीर मुद्दे पर बार-बार मध्यस्थता की पेशकश ने अमेरिकी कूटनीति की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के बयानों से क्षेत्रीय स्थिरता के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

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