यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी रणनीतिक हलचल सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ईरान के प्रभाव से मुक्त कराने और समुद्री मार्ग को जबरन खोलने की तैयारी कर रहा है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह कदम आगे बढ़ता है, तो UAE फारसी खाड़ी का वह पहला देश बन जाएगा जो ईरानी हमलों के जोखिम के बावजूद सीधे तौर पर इस सैन्य मोर्चेबंदी में शामिल होगा। वैश्विक गठबंधन के लिए लॉबिंग शुरू रिपोर्ट के मुताबिक, UAE के राजनयिक केवल सैन्य तैयारी ही नहीं कर रहे, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक विशेष प्रस्ताव लाने के लिए भी सक्रिय रूप से लॉबिंग कर रहे हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए की जाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय वैधता दिलाना है। अधिकारियों ने बताया कि यूएई ने अमेरिका, यूरोप और एशिया की प्रमुख सैन्य ताकतों से आग्रह किया है कि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बाधित होने से बचाने के लिए एक 'ज्वाइंट टास्क फोर्स' का गठन करें। राष्ट्रपति ट्रंप का सख्त रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए अपना सख्त रुख साफ कर दिया है कि जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी खुद उठानी होगी; पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने दो टूक कहा, "जाओ अपना तेल खुद हासिल करो, यह केवल अमेरिका का काम नहीं है," जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब अमेरिका अकेले वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग को खुला रखने का बोझ नहीं उठाएगा। क्यों अहम है 'होर्मुज स्ट्रेट'? होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल ट्रांजिट चोकपॉइंट' माना जाता है, क्योंकि ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है; इसकी भौगोलिक संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका सबसे संकरा हिस्सा मात्र 33 से 35 किलोमीटर चौड़ा है, जिसमें जहाजों के आवागमन के लिए केवल 2 मील का गलियारा उपलब्ध है। आर्थिक दृष्टि से यह मार्ग वैश्विक लाइफलाइन है, क्योंकि सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों की कच्चा तेल सप्लाई इसी रास्ते पर टिकी है, जिसके चलते यहाँ उत्पन्न होने वाली मामूली सी बाधा भी पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है। युद्ध का नया मोर्चा? यूएई के अधिकारियों का मानना है कि ईरान जानबूझकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने के लिए इस जलमार्ग में बाधा उत्पन्न कर रहा है। ऐसे में यूएई का सक्रिय रूप से आगे आना इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। हालांकि, सीधे सैन्य गठबंधन में शामिल होने से यूएई पर ईरानी जवाबी हमलों का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध (All-out War) की आशंका गहरा गई है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: 1 अप्रैल से देशभर में टोल टैक्स 5% महंगा; कोटवन-करमन बॉर्डर पर भी बढ़ीं दरें, जानें नई रेट [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]