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World: रूसी तेल खरीद पर अमेरिका ने भारत को दी एक महीने की और राहत; 16 मई तक बढ़ी छूट

by Tarun Bhardwaj • April 18, 2026
US Grants India Another Month of Relief on Russian Oil Purchases

World: रूसी तेल खरीद पर अमेरिका ने भारत को दी एक महीने की और राहत; 16 मई तक बढ़ी छूट

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यूनिक समय, नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत की एक बड़ी खबर वाशिंगटन से आई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट (Waiver) को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। इसे ट्रंप प्रशासन के रुख में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कुछ ही समय पहले अमेरिका ने इस छूट को आगे न बढ़ाने के कड़े संकेत दिए थे।

16 मई तक नया लाइसेंस जारी

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा देर रात जारी किए गए नए लाइसेंस के अनुसार अब भारत सहित अन्य देश 16 मई तक समुद्री मार्ग से रूसी तेल का आयात जारी रख सकते हैं। इससे पहले दी गई रूसी तेल खरीद छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी, जिसके बाद वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। हालांकि, इस नए लाइसेंस में स्पष्ट किया गया है कि ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से संबंधित लेन-देन पर किसी भी तरह की कोई राहत नहीं दी गई है।

यू-टर्न की वजह

जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने यह कदम मजबूरी में उठाया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में रूसी तेल की आपूर्ति को अचानक रोकने से अमेरिका सहित पूरी दुनिया में महंगाई का बड़ा संकट खड़ा हो सकता था।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारत वर्तमान में रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में भारत ने रूस से 5.8 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जो फरवरी (1.54 अरब डॉलर) के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा है। रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत को एक ‘विश्वसनीय साझेदार’ बताते हुए भरोसा दिलाया है कि वे कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई और बढ़ाएंगे। रूसी तेल पर छूट जारी रहने से भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता क्रूड मिलता रहेगा, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

अमेरिकी सांसदों और ट्रेजरी सचिव की नाराजगी

इस फैसले ने अमेरिकी घरेलू राजनीति में हलचल मचा दी है। कई अमेरिकी सांसदों ने इस कदम पर नाराजगी जताई है। उनका तर्क है कि इस छूट से रूस और ईरान जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं को ताकत मिलती है, जो यूक्रेन युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के लिए जिम्मेदार हैं।

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने पहले स्पष्ट रूप से कहा था कि छूट का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। अब इस फैसले को उनके पिछले रुख से पीछे हटने के तौर पर देखा जा रहा है।

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