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फीस नहीं जमा होने पर स्कूली बच्चों को धूप में किया खड़ा

by यूनिक समय • October 18, 2022
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यूपी के उन्नाव में फीस नहीं जमा करने पर स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को धूप में खड़ा कर दिया। बच्चे स्कूल से घर पहुंचे और परिजनों को पूरी बात बताई। इस पर परिजन स्कूल पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। मामला बढ़ता देख एक बीजेपी कार्यकर्ता ने बच्चों की फीस जमा कर दी।

उन्नावयूपी के उन्नाव जिले में फीस न जमा होने पर विद्यालय प्रबंधन ने मासूम छात्रों को धूप में खड़ा रखने का मामला सामने आया है। साथ ही बच्चों को परीक्षा देने से भी रोक दिया गया है और उनको स्कूल से बाहर निकाल दिया गया। बच्चे रोते हुए स्कूल से बाहर निकले तो अभिभावकों ने हंगामा खड़ा कर दिया। पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वहीं, वरुण गांधी ने ट्वीट किया। लिखा-इस बेटी के आंसू उन लाखों बच्चों की संयुक्त पीड़ा बता रहे हैं, जिन्हें फीस न जमा होने के कारण उपहास झेलना पड़ता है। आर्थिक तंगी बच्चों की शिक्षा में रोड़ा ना बने यह हर जिले के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी है। निजी संस्थान मानवता न भूलें, शिक्षा व्यापार नहीं है। इसके बाद एक बीजेपी कार्यकर्ता ने बच्चे की फीस जमा कर दी। साथ ही एक ट्वीट भी किया है, जिसमें लिखा है कि बांगरमऊ में बच्चों की इस सत्र की फीस जमा करा दी गई है। बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं, स्कूल प्रबंधन से कहा गया है कि किसी भी बच्चे से दुर्व्यवहार न करें।

फीस न जमा होने के कारण बच्चों को स्कूल से निकाला

जानकारी के मुताबिक, बांगरमऊ में एक निजी स्कूल संचालित है। जहां पर पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षाएं चल रही हैं। सोमवार को जिन बच्चों की फीस नहीं जमा थी, उनको स्कूल प्रशासन ने परीक्षा देने से मना कर दिया। साथ ही कमरे से बाहर धूप में खड़ा कर दिय और स्कूल से छुट्टी होने के बाद उन्हें बाहर भी निकाल दिया। रोते हुए बच्चे घर पहुंचे और अपने परिजनों को पूरी बात बताई। बच्चों को रोता देख परिजन स्कूल पहुंचकर हंगामा किया।

स्कूल के कई बच्चों की फीस महीनों से थी बाकी

स्कूल के प्रधानाचार्य अरुण कुमार पांडेय से जब एनबीटी ऑनलाइन ने बात की तो उन्होंने कहा कि इस समय परीक्षा चल रही है और स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चों की फीस कई-कई महीने की बाकी थी। फीस जमा करने के लिए बार बार कहा जा रहा था, फिर भी बच्चों के अभिभावक ने फीस नहीं जमा की थी, इसलिए वह परीक्षा नहीं दे पाए थे।

फिर से कराई जा रही है परीक्षा

साथ ही बताया कि जो बच्चे सोमवार को परीक्षा नहीं दे पाए थे। उनकी परीक्षा मंगलवार को फिर से कराई जा रही है। साथ ही यह भी माना की बच्चों को परीक्षा देने से मना नहीं करना चाहिए था, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि स्कूल जिन्हें शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, वह केवल क्या व्यवसाय का जरिया ही बनकर रह गए है। अगर स्कूल प्रशासन बच्चों को परीक्षा से वंचित न करता तो शायद यह हंगामा न खड़ा होता और बच्चों का बाल मन व्यथित भी न होता।

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