नई दिल्ली। इसरो के मिशन चंद्रयान-3 द्वारा भेजा गया प्रज्ञान रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चहलकदमी कर रहा है। यह अपने अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से खोजबीन कर रहा है। इसके साथ ही रोवर ने मेड इन इंडिया, मेड फोर मून का संदेश दिया है। https://twitter.com/isro/status/1694545322251571687?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1694545322251571687%7Ctwgr%5Ee364a8328d170dcd35434329ecb30117b8d541ff%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.asianetnews.com%2Fnational-news%2Findia-took-a-walk-on-the-moon-pragyan-rover-exits-chandrayaan-3-landing-module-vva%2Farticleshow-2hv1l1m इसरो ने गुरुवार सुबह जानकारी दी कि चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर विक्रम लैंडर मॉड्यूल से बाहर निकल गया है। यह चंद्रमा की सतह पर खोजबीन कर रहा है। इसरो ने पहले घोषणा की थी कि चंद्रमा पर विक्रम लैंडर के टचडाउन के दौरान उड़े धूल के जमने के बाद रोवर लैंडिंग मॉड्यूल से बाहर आएगा। चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर चंद्रमा पर 14 दिनों तक काम करेगा। प्रज्ञान रोवर चंद्रमा पर 14 दिनों तक काम करेगा। चंद्रमा का एक दिन धरती के 14 दिनों के बराबर होता है। इस दौरान सूर्य की किरणें लगातार पड़ती है। प्रज्ञान रोवर सोलर के माध्य से सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा ग्रहण करेगा। प्रज्ञान रोवर चंद्रमा के रासायनिक बनावट की जांच करेगा। पता लगाएगा कि कहां पानी है। चंद्रमा पर कौन-कौन से तत्व हैं। यह चंद्रमा पर आने वाले भूकंप की जांच करेगा। इसके साथ ही देखेगा कि चंद्रमा के क्रस्ट और मेंटल की संरचना कैसी है। प्रज्ञान रोवर सभी जरूरी उपकरणों से है लैस -Chandrayaan-3 Pragyan Rover चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर छोटे टेबल के आकार का है। इसका वजन 26 किलोग्राम है। इसमें छह पहिए लगे हैं ताकि चांद की असमतल जमीन पर चलने में परेशानी नहीं हो। यह चंद्रमा की सतह की जांच करने के लिए जरूरी उपकरणों से लैस है। यह चंद्रमा का वायुमंडल बनाने वाले तत्वों के बारे में जानकारी एकत्र करेगा। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद फिसली ममता बनर्जी की जुबान, कहा—‘जब राकेश रोशन चंद्रमा पर उतरे’ प्रज्ञान रोवर लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप और अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर से लैस है। LIBS का किसी भी वस्तू का उद्देश्य गुणात्मक और मात्रात्मक तात्विक विश्लेषण करना है। यह चांद के सतह के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएगा। यह बताएगा कि सतह की रासायनिक संरचना कैसी है। इसके खनिज की संरचना कैसी है। वहीं, APXS चंद्रमा पर लैंडिंग स्थल के आसपास मिट्टी और चट्टानों की मौलिक संरचना (मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, पोटेशियम, कैल्शियम टाइटेनियम और आयरन) का पता लगाएगा।