यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया है। उन पर सोलर उद्योग लगाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था, जिसकी पुष्टि होने के बाद यह कार्यवाही की गई। यह पहला मौका नहीं है जब सीएम योगी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ इतनी सख्ती दिखाई हो। अभिषेक प्रकाश से पहले अब तक उनके कार्यकाल में 11 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है, हालांकि इनमें से कुछ को बाद में बहाल भी कर दिया गया। अन्य निलंबित अधिकारियों की सूची: घनश्याम सिंह – लखीमपुर खीरी में ज़मीन पैमाइश में देरी का मामला। देवीशरण उपाध्याय – अलीगढ़ में 35 भूखंडों के पट्टों की अनियमित बहाली। टीके शीबू – सोनभद्र के डीएम रहते भ्रष्टाचार के आरोप। सुनील कुमार वर्मा – औरैया के डीएम रहते पद के दुरुपयोग का मामला। देवेंद्र कुमार पांडेय – उन्नाव में शिक्षा विभाग की खरीद में गड़बड़ी। अमरनाथ उपाध्याय – महाराजगंज में गो-संरक्षण में भ्रष्टाचार। केदारनाथ सिंह – पर्यटन विभाग में अनियमितता। शारदा सिंह – ओबीसी कोटे में भर्ती नियमों का पालन न करने का आरोप। जितेंद्र बहादुर सिंह – अनाज घोटाले में दोषी पाए गए। कुमार प्रशांत – फतेहपुर में सरकारी गेहूं खरीद में अनियमितता। योगी सरकार का यह सख्त रुख़ दर्शाता है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।