यूनिक समय, नई दिल्ली। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस विशेष दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा की जाती है। इस साल शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है. आज के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है, जिसकी किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं। शरद पूर्णिमा का महत्व और व्रत कोजागरी पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा के दिन व्रती रात में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और चांद की रोशनी के नीचे खीर रखते हैं। माना जाता है कि जब चंद्रमा की अमृतमयी किरणें इस खीर पर पड़ती हैं, तो इसका सेवन करने से शरीर को ढेरों फायदे प्राप्त होते हैं। अगले दिन सुबह इसी खीर को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय 2025 नई दिल्ली - 05:27 PM पटना - 04:56 PM भोपाल - 05:28 PM रांची - 04:56 PM कोलकाता - 04:43 PM चंडीगढ़ - 04:43 PM लखनऊ - 04:43 PM मुंबई - 05:48 PM पुणे - 05:44 PM मथुरा - 05:26 PM वाराणसी - 05:05 PM दिसपुर - 04:28 PM कानपुर - 05:15 PM गोरखपुर - 05:03 PM चांद की पूजा विधि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की पूजा मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के बाद की जाती है। रात में चंद्रमा निकलने पर एक लोटे में दूध, जल, चावल और सफेद फूल मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। चावल की खीर को तैयार करके रात भर खुले आसमान के नीचे रखें। अगले दिन सुबह इस खीर को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करके अपना व्रत खोलें। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। ये भी पढ़ें: IBPS RRB 2025: आवेदन में सुधार के लिए करेक्शन विंडो आज से खुली, 7 अक्टूबर तक कर सकेंगे बदलाव