
यूनिक समय, नई दिल्ली। जापान में आज एक नया इतिहास रचा गया है। देश के निचले सदन ने मंगलवार को साने ताकाइची को जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना। 64 वर्षीय इस कंजर्वेटिव नेता ने 465-सदस्यीय सदन में 237 वोट हासिल कर बहुमत से जीत दर्ज की। वह औपचारिक रूप से जापानी सम्राट नारुहितो से मिलने के बाद पदभार संभालेंगी और प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा का स्थान लेंगी।
ताकाइची की जीत के मायने और चुनौतियाँ:
साने ताकाइची की जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जापान में संसद और बड़ी कंपनियों के प्रमुख पदों पर पुरुषों का वर्चस्व रहा है। उनकी जीत देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वह जापान की पाँचवी प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं।
ताकाइची 4 अक्टूबर को सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की नेता बनी थीं। हालांकि, पार्टी के काले धन घोटाले और उनके रूढ़िवादी विचारों के कारण, कोमेइतो पार्टी ने 6 दिन बाद 1999 से चले आ रहे गठबंधन को तोड़ दिया।
गठबंधन टूटने के बाद, ताकाइची को सुधारवादी, दक्षिणपंथी जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) का समर्थन हासिल करना पड़ा। LDP-JIP गठबंधन पर सोमवार शाम को हस्ताक्षर किए गए। JIP खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर खत्म करने, संगठनात्मक दान पर प्रतिबंध और सांसदों की संख्या कम करने जैसे बदलावों का समर्थन करती है।
ताकाइची ने सोमवार को “जापान की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और जापान को एक ऐसे देश के रूप में नया रूप देने का संकल्प लिया जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जिम्मेदार हो सके।”
कड़ा भू-राजनीतिक रुख:
भू-राजनीतिक मोर्चे पर, ताकाइची अपने चीन विरोधी कड़े रुख के लिए जानी जाती हैं और चीन को अपना मुख्य प्रतिद्वंदी मानती हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री आबे की तरह जापान की सेना को मजबूत करने और देश के संविधान में संशोधन का भी समर्थन करती हैं। वह टोक्यो के यासुकुनी श्राइन जाती रही हैं, जो अक्सर पड़ोसी देशों को नाराज कर देता है।
राजनीतिक सफर:
ताकाइची का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। 2024 के LDP नेतृत्व चुनाव में वह शिगेरु इशिबा से हार गई थीं, लेकिन इस साल सितंबर में इशिबा के इस्तीफे के बाद उन्होंने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी को हराकर पार्टी का नेतृत्व जीत लिया। 2024 के चुनाव में उन्होंने जापान बैंक की ब्याज दर बढ़ाने की योजना की आलोचना भी की थी।
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