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Breaking News: राजपाल यादव केस में नया मोड़; भाई श्रीपाल यादव ने आर्थिक तंगी और लोन के दावों को नकारा

by Tarun Bhardwaj • February 11, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर हास्य अभिनेता राजपाल यादव के सरेंडर के बाद उनके भाई श्रीपाल यादव ने एक नया और अलग पक्ष सामने रखा है, जो वर्तमान में चल रही खबरों से बिल्कुल भिन्न है। जहाँ एक ओर मीडिया रिपोर्ट्स राजपाल यादव के आर्थिक तंगी में होने और फिल्म जगत से सहयोग न मिलने की बात कह रही हैं, वहीं उनके भाई ने इन दावों को पूरी तरह से झुठला दिया है। श्रीपाल यादव का कहना है कि राजपाल कभी ऐसे शब्द नहीं कह सकते और न ही वह किसी मुसीबत में किसी के सामने गुहार लगाएंगे।

लोन नहीं, निवेश का था मामला

श्रीपाल यादव ने स्पष्ट किया कि राजपाल यादव ने कोई व्यक्तिगत लोन नहीं लिया था, बल्कि उन्होंने एक फिल्म में पैसा निवेश किया था। उनके अनुसार, राजपाल ने निवेश से जुड़े कुछ कागजों पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन जब फिल्म ‘अता पता लापता’ फ्लॉप हो गई, तो उन हस्ताक्षरों को आधार बनाकर उनसे भारी निवेश की मांग की जाने लगी। भाई का दावा है कि राजपाल जल्द ही यह साबित कर देंगे कि उन्होंने कोई कर्ज नहीं लिया था और वे कानूनी रूप से पाक-साफ होकर बाहर आएंगे।

पारिवारिक भरोसा और कानूनी प्रक्रिया

जेल जाने से पहले राजपाल की अपने भाई से अंतिम बातचीत काफी सकारात्मक रही थी, जिसमें उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया कि यह केवल एक दिन की अदालती कार्यवाही और कुछ औपचारिक कानूनी प्रक्रियाएं हैं। श्रीपाल यादव ने बताया कि उनका परिवार इस समय एक शादी के उत्सव की तैयारी कर रहा है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि राजपाल जल्द ही इस खुशी के मौके पर उनके बीच मौजूद होंगे। यह बयान उन अटकलों को खारिज करता है कि अभिनेता पूरी तरह से टूट चुके हैं या उन्हें इंडस्ट्री में अकेले छोड़ दिया गया है।

कोर्ट का कड़ा रुख और मौजूदा स्थिति

हालांकि भाई का पक्ष भावनात्मक और समर्थन भरा है, लेकिन कानूनी धरातल पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल के व्यवहार पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने बार-बार अंडरटेकिंग (वचन) तोड़ने के कारण उनकी अर्जी खारिज कर दी और उन्हें 5 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा, जहाँ वे अब अपनी छह महीने की सजा काट रहे हैं। बकाया राशि, जो 2010 में ₹5 करोड़ थी, अब ब्याज और जुर्माने के साथ लगभग ₹9 करोड़ तक पहुँच चुकी है, जिसे लेकर यह कानूनी लड़ाई जारी है।

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