
यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में 213 सीटों के साथ ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारत के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तारिक रहमान को दी गई जीत की बधाई के जवाब में, बीएनपी ने अब एक सकारात्मक और मैत्रीपूर्ण कूटनीतिक रुख अपनाने का संकेत दिया है। यह बयान दोनों देशों के बीच दशकों पुराने रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकता है।
पीएम मोदी की बधाई पर बीएनपी का जवाब
बीएनपी मीडिया सेल के सदस्य सयरुल कबीर खान ने पीएम मोदी के बधाई संदेश का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी भारत के प्रधानमंत्री और अन्य वैश्विक नेताओं से मिले समर्थन के लिए आभारी है। कबीर ने स्पष्ट किया कि बीएनपी का नेतृत्व बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करने की उम्मीद करता है। उन्होंने इसे तारिक रहमान के विजन का हिस्सा बताया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया गया है।
‘लोकतंत्र की जीत’ और सादगी का संदेश
पार्टी ने इस प्रचंड बहुमत को केवल राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया है। सयरुल कबीर खान ने कहा कि तारिक रहमान ने कार्यकर्ताओं को अत्यधिक जश्न या शोर-शराबे से बचने का सख्त निर्देश दिया है। इसके पीछे की वजह उन हजारों कार्यकर्ताओं और शहीदों का बलिदान है, जिन्होंने इस लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए अपनी जान गंवाई या कष्ट सहे। पार्टी ने विशेष रूप से जुलाई और अगस्त 2024 के जन-आंदोलन के शहीदों को याद किया।
बेगम खालिदा जिया को श्रद्धांजलि
बीएनपी ने अपनी नेता और ‘लोकतंत्र की मां’ बेगम खालिदा जिया के निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए उन्हें जीत समर्पित की है। कबीर ने बताया कि पार्टी का अगला लक्ष्य तारिक रहमान के नेतृत्व में एक समृद्ध ‘कल्याणकारी राज्य’ का निर्माण करना है। इसके लिए वे अपने 31-सूत्रीय राष्ट्रीय सुधार और विकास योजना को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। देश के सभी धार्मिक स्थलों पर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष प्रार्थनाओं का भी आह्वान किया गया है।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी का यह बयान नई दिल्ली और ढाका के बीच विश्वास बहाली की दिशा में पहला ठोस कदम है। शेख हसीना के दौर के बाद, बीएनपी का ‘मैत्रीपूर्ण संबंधों’ की बात करना यह दर्शाता है कि नई सरकार भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बाधित नहीं करना चाहती, बल्कि उसे नए सिरे से परिभाषित करने की इच्छुक है।
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