
यूनिक समय, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया कि पीड़ितों की शिकायतों पर गलत रिपोर्ट लगाने वाले या जांच में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को अब जेल की हवा खानी पड़ सकती है। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक लहजे में निर्देश दिए कि हर मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और गहन होनी चाहिए।
गलत रिपोर्ट पर FIR और ‘जमीन माफिया’ पर प्रहार
जनता दर्शन में जब कई फरियादियों ने यह शिकायत की कि उनके मामलों में अधिकारियों ने मौके पर जाए बिना या मिलीभगत कर गलत रिपोर्ट लगा दी है, तो मुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया।
सीएम ने तुरंत आदेश दिया कि जिन अधिकारियों ने जांच में जानबूझकर गड़बड़ी की है या झूठी रिपोर्ट पेश की है, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।
जमीन कब्जाने की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में किसी भी गरीब की जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने जमीन माफियाओं के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई और प्रभावी ‘बुलडोजर’ नीति जैसे कड़े संदेश दिए।
इलाज के लिए सरकारी खजाना खुला
जनता दर्शन में केवल शिकायतें ही नहीं सुनी गईं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी परिचय मिला। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगने आए लोगों को सीएम ने बड़ी राहत दी। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अस्पतालों से इलाज का एस्टीमेट (अनुमानित खर्च) बनवाकर जल्द से जल्द शासन को भेजें। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से इलाज के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी ताकि किसी भी नागरिक का उपचार धन के अभाव में न रुके।
“देरी करने वाले भी कार्रवाई के लिए तैयार रहें”
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो अधिकारी पीड़ितों की समस्याओं के समाधान में जानबूझकर देरी कर रहे हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को ‘सेंसिटिव’ (संवेदनशील) बनने की सलाह देते हुए कहा कि सरकार हर नागरिक को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और जनता की सेवा में किसी भी स्तर की लापरवाही अक्षम्य होगी।
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