Breaking News: यूपी में प्राइवेट अस्पतालों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन; 178 के लाइसेंस निरस्त, 533 सील

Yogi government takes major action against private hospitals in UP

यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ योगी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। विधानसभा में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को जानकारी दी कि प्रदेश भर से मिली करीब 500 गंभीर शिकायतों के आधार पर 178 प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। सरकार की इस सख्त कार्रवाई से निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हालांकि, उचित सुनवाई और कमियों को दूर करने के बाद इनमें से 59 अस्पतालों के लाइसेंस बहाल भी किए गए हैं।

अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार केवल लाइसेंस रद्द करने तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि अवैध रूप से संचालित संस्थानों के खिलाफ भी अत्यंत कड़ा रुख अपनाया गया है। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 281 निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 533 अस्पतालों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग ने 1542 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी है कि वे जल्द से जल्द अपने कामकाज के तौर-तरीकों में सुधार सुनिश्चित करें।

मनमाने खर्च पर सरकार का स्पष्टीकरण

समाजवादी पार्टी के सदस्य अतुल प्रधान द्वारा प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के भारी खर्च और डॉक्टरों की मनमानी फीस पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में निजी चिकित्सकों के परामर्श शुल्क या मेडिकल टेस्ट की दरों को निर्धारित करने या उनमें एकरूपता लाने की कोई विशेष नीति सरकार के पास नहीं है। उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र अपनी दरें स्वयं तय करता है, लेकिन लापरवाही पर कार्रवाई सुनिश्चित है।

सरकारी और मुफ्त इलाज पर जोर

निजी अस्पतालों की मनमानी के बीच स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का पुरजोर पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के अस्पतालों में जनता को चिकित्सीय परामर्श और दवाइयों सहित पूरी तरह निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत कार्ड धारकों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल रहा है और विशेष रूप से 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए ‘आयुष्मान वय वंदना योजना’ के माध्यम से अतिरिक्त लाभ प्रदान किए जा रहे हैं।

यह पूरी जानकारी यूपी विधानसभा में सपा विधायक अतुल प्रधान द्वारा पूछे गए अनुपूरक प्रश्न के जवाब के दौरान सामने आई, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि मरीजों के स्वास्थ्य और हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अस्पताल पर सरकार की पैनी नजर बनी हुई है।

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