MILAN 2026: विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया ‘मिलन 2026’ का भव्य उद्घाटन

Rajnath Singh inaugurated 'Milan 2024' with great pomp

यूनिक समय, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक ‘मिलन 2026’ का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में कोई भी नौसेना अकेले समुद्री चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

रक्षा मंत्री का संबोधन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन के दौरान उन वैश्विक खतरों पर विशेष बल दिया जो वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शांति के मार्ग में बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने उभरते हुए खतरों का जिक्र करते हुए समुद्री डकैती, आतंकवाद, अवैध मछली पकड़ने और तस्करी के साथ-साथ विशेष रूप से साइबर जोखिमों को एक अत्यंत गंभीर चुनौती करार दिया।

सप्लाई चेन के विषय पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में आने वाले किसी भी तरह के व्यवधान का सीधा और नकारात्मक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इन परिस्थितियों ने दुनिया भर में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की आवश्यकता एवं मांग को काफी बढ़ा दिया है।

‘सागर’ से ‘महासागर’ तक का सफर

रक्षा मंत्री ने भारत की बदलती समुद्री नीति पर जोर देते हुए कहा कि भारत का विजन अब ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) से आगे बढ़कर ‘महासागर’ तक विस्तृत हो चुका है। यह बदलाव क्षेत्रीय सीमाओं से परे जाकर वैश्विक स्तर पर साझेदारी मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मिलन 2026: रिकॉर्ड 74 देशों की भागीदारी

विशाखापत्तनम में आयोजित ‘मिलन 2026’ नौसैनिक अभ्यास इस बार कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का गवाह बन रहा है, क्योंकि इसमें कुल 74 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं, जो इसे अब तक का सबसे बड़ा और समावेशी समुद्री अभ्यास बनाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस विशाल भागीदारी को भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और वैश्विक समुद्री समुदाय द्वारा भारत पर जताए गए अटूट विश्वास का एक सशक्त प्रतीक बताया है। इसके साथ ही, उन्होंने ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी’ ($UNCLOS$) के महत्व पर जोर देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित एक न्यायसंगत समुद्री व्यवस्था स्थापित करने की पुरजोर वकालत की है।

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