
यूनिक समय, नई दिल्ली। संगम नगरी में वेदपाठी बटुकों के यौन शोषण मामले में आरोपी बनाए गए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को मीडिया के सामने आकर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने इन आरोपों को एक गहरी साजिश और शंकराचार्य संस्था को अपमानित करने का ‘कुत्सित प्रयास’ करार दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस से कराने की मांग की है।
आरोपों पर सफाई
शंकराचार्य ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें बच्चों के यौन शोषण की बात कही गई है। उन्होंने तर्क दिया कि मौनी अमावस्या की घटना के समय से वे लगातार सीसीटीवी कैमरों और मीडिया की नजरों में रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बच्चों ने शिकायत दर्ज कराई है, वे न तो कभी उनके विद्यार्थी रहे हैं और न ही कभी उनके किसी शिविर या आश्रम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे बच्चे अचानक कहाँ से प्रकट हो गए?
सरकार पर निशाना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़े शब्दों में कहा कि सनातन परंपरा में हमेशा से कालनेमि, राहु और रावण जैसे छद्म वेशी (भेष बदलने वाले) रहे हैं, लेकिन अंत में उनका पर्दाफाश होकर रहता है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार उनकी ‘गौ-संरक्षण’ की प्रखर मांग से घबरा गई है और उन्हें दबाने के लिए इस तरह के नीच आरोप लगवा रही है।
पुलिस की कार्रवाई और शंकराचार्य का रुख
प्रयागराज पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय विशेष टीम (SIT) का गठन किया है, जो वर्तमान में साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से पीड़ितों की तलाश और उनके मेडिकल परीक्षण व बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटी है।
दूसरी ओर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि इस मामले में गिरफ्तारी जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसे देश की सर्वोच्च धार्मिक संस्था को नीचा दिखाने के एक जानबूझकर किए गए प्रयास के रूप में देखा जाएगा।
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