Ranji Trophy Final: रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर ने रचा इतिहास; कर्नाटक को पछाड़कर पहली बार बना ‘देश का चैंपियन’

Jammu and Kashmir created history in the Ranji Trophy

यूनिक समय, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। दशकों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद, जम्मू-कश्मीर ने दिग्गज टीम कर्नाटक को मात देकर पहली बार रणजी ट्रॉफी का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया है। कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में टीम ने हुबली के मैदान पर वह करिश्मा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद क्रिकेट जगत को नहीं थी।

पहली पारी की बढ़त ने दिलाई जीत

जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में हासिल की गई 291 रनों की विशाल बढ़त के आधार पर कर्नाटक को पछाड़कर रणजी ट्रॉफी का ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने अपनी पहली पारी में 584 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया था, जिसके जवाब में कर्नाटक की टीम केवल 293 रनों पर ही सिमट गई। मैच के पांचवें दिन जम्मू-कश्मीर ने अपनी दूसरी पारी में 4 विकेट खोकर 342 रन बनाए, जिससे उनकी कुल बढ़त 633 रनों तक पहुँच गई।

इस पारी के दौरान सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल ने नाबाद 160 रन और साहिल लोटरा ने नाबाद 101 रनों की पारी खेली, साथ ही दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 197 रनों की अटूट और ऐतिहासिक साझेदारी कर कर्नाटक के गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया। अंत में कप्तान पारस डोगरा ने पारी घोषित करने का निर्णय लिया और दोनों कप्तानों की आपसी सहमति से मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप पहली पारी की बढ़त के नियम के तहत जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।

66 साल का लंबा इंतजार

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के लिए रणजी ट्रॉफी का यह खिताब रातों-रात हासिल नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे 66 वर्षों का एक लंबा और कड़ा संघर्ष छिपा है। टीम ने पहली बार 1959-60 के सत्र में इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था, लेकिन तब से लेकर अब तक उसे कभी भी खिताब का मजबूत दावेदार नहीं माना गया।

राज्य को अपनी पहली जीत दर्ज करने के लिए पूरे 44 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा, जो अंततः 1982-83 के सत्र में सेना (Services) के खिलाफ मिली थी. इस ऐतिहासिक सत्र से पहले जम्मू-कश्मीर ने कुल 334 रणजी मैच खेले थे, जिनमें से टीम को केवल 45 मैचों में ही सफलता प्राप्त हुई थी। टीम के आत्मविश्वास में बड़ा बदलाव 2013-14 में आया जब उन्होंने पहली बार क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और उसके बाद 2015-16 में मुंबई जैसी दिग्गज टीम को वानखेड़े स्टेडियम में हराकर क्रिकेट जगत को अपनी क्षमता का परिचय दिया।

स्टेडियम में उमड़ा उत्साह

जम्मू-कश्मीर की इस ऐतिहासिक जीत का गवाह बनने के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्वयं स्टेडियम में उपस्थित रहे, जहाँ उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया. मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मैच की तस्वीरें साझा करते हुए इस उपलब्धि को पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया। टीम की इस सफलता में कामरान इकबाल ने दूसरी पारी में नाबाद 160 रनों की शानदार पारी खेलकर और साहिल लोटरा ने नाबाद 101 रन बनाकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। गेंदबाजी में आकिब नबी डार ने पहली पारी में कर्नाटक के पांच विकेट झटककर विरोधी टीम की कमर तोड़ दी थी, जबकि कप्तान पारस डोगरा ने पूरी टीम का कुशलतापूर्वक नेतृत्व करते हुए इस जीत को संभव बनाया।

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