
यूनिक समय, नई दिल्ली। असम के आसमान से एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 (Sukhoi-30) लड़ाकू विमान गुरुवार शाम को दुर्घटना का शिकार हो गया। यह विमान एक नियमित ट्रेनिंग मिशन पर था और इसने जोरहाट स्थित रोवरिया एयरफोर्स बेस से उड़ान भरी थी। जिसके बाद शाम लगभग 7:42 बजे रडार से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। प्रारंभिक जानकारी और पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह विमान कार्बी आंगलोंग जिले के चोकीहोला (नीलिप ब्लॉक) के पास एक बेहद दुर्गम और पहाड़ी वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर शहीद हो गए।
ऑपरेशन ‘सर्च एंड रेस्क्यू’
वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ने गुरुवार शाम जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसका कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया और यह रडार से गायब हो गया। वायुसेना की विशेष सर्च और रेस्क्यू टीम, स्थानीय पुलिस, नागरिक प्रशासन और क्षेत्र के ग्रामीणों ने मिलकर रात करीब एक बजे ही तलाशी अभियान शुरू कर दिया था। भारी मशक्कत के बाद, जोरहाट एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर एक बेहद दुर्गम और घने वन क्षेत्र में विमान का मलबा मिला। शुक्रवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान विमान का मलबा और पायलटों के पार्थिव शरीर बरामद किए गए हैं, जिससे पूरे रक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
जांच के आदेश
वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर इस दुखद घटना की पुष्टि कर दी है और हादसे की तह तक जाने के लिए ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञ टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या फिर मौसम और अन्य बाहरी परिस्थितियां इसके लिए जिम्मेदार थीं। सुखोई-30 MKI को भारतीय वायुसेना का सबसे आधुनिक और शक्तिशाली विमान माना जाता है, ऐसे में इस दुर्घटना को न केवल मानवीय आधार पर बल्कि सैन्य क्षमता के लिहाज से भी एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
देश के वीर सपूतों को नमन
यह हादसा उस समय और भी भावुक हो गया जब एयर एम्बुलेंस हादसे में शहीद हुए कैप्टन स्वराजदीप सिंह जैसे अन्य वीर जवानों की यादें ताज़ा हो गईं। असम की इन दुर्गम पहाड़ियों में अपना कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले दोनों पायलटों के प्रति देश नतमस्तक है। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती
असम में सुखोई-30 लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने अपनी आपबीती साझा की है, जिससे इलाके में व्याप्त दहशत का पता चलता है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 7 बजे पहाड़ियों की तरफ से एक अत्यंत तेज धमाके की आवाज सुनाई दी थी, जिसकी गूंज से पूरे क्षेत्र के लोगों में डर फैल गया।
कुछ चश्मदीदों ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने इस जोरदार धमाके के तुरंत बाद घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के ऊपर से आग का एक बड़ा गोला उठते हुए देखा था। यह दुर्घटना रिहायशी बस्तियों से काफी दूर घने और दुर्गम वन क्षेत्र में हुई है, जिस कारण स्थानीय लोगों के लिए भी वहां तुरंत पहुंचना लगभग असंभव साबित हो रहा है।
सुखोई-30 MKI
सुखोई-30 MKI को भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है, जो अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण एक शक्तिशाली योद्धा के रूप में पहचाना जाता है। यह विशेष रूप से दो सीटों वाला और लंबी दूरी तक मार करने वाला एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जो विभिन्न युद्धक परिस्थितियों में सक्षम है।
हालांकि इसे मूल रूप से रूसी विमान निर्माता सुखोई कंपनी द्वारा विकसित किया गया था, लेकिन वर्तमान में भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) लाइसेंस के तहत इसका सफलतापूर्वक निर्माण करती है। वायुसेना की मारक क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में उनके बेड़े में ऐसे 260 से अधिक सुखोई-30 विमान शामिल हैं।
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