
यूनिक समय, नई दिल्ली। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके पूर्व शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच का विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है। नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने रविवार को रीवा एक्सप्रेस में अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद सोमवार को प्रयागराज की पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है। इस अर्जी में उन्होंने शंकराचार्य के विदेश भागने की आशंका जताते हुए उनका पासपोर्ट जब्त करने और उनकी ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई है।
अर्जी में गंभीर आरोप
आशुतोष ब्रह्मचारी ने पॉक्सो कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में गंभीर आरोप लगाते हुए सूचित किया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ के बहाने लखनऊ के रास्ते विदेश फरार हो सकते हैं। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि शंकराचार्य का पासपोर्ट और वीजा तत्काल प्रभाव से जब्त किया जाए ताकि वे कानूनी प्रक्रिया से बचकर देश से बाहर न जा सकें। आशुतोष का यह भी दावा है कि यह गौ यात्रा जानबूझकर उन जिलों से निकाली जा रही है जहाँ यौन उत्पीड़न के शिकार नाबालिग बटुक रहते हैं, जिससे गवाहों और पीड़ितों की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
अर्जी में यह भी तर्क दिया गया है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केवल गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन उन्हें अपना स्थान छोड़ने की अनुमति नहीं दी थी, इसलिए यह यात्रा निकालना सीधे तौर पर अदालत के आदेशों की अवमानना है।
जानलेवा हमले और ‘स्वाति अघोरी’ का रहस्य
ट्रेन में हुए हमले का जिक्र करते हुए आशुतोष ने आरोप लगाया कि यह हमला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इशारे पर हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले को सही ठहराने वाली स्वाति अघोरी नाम की महिला पर बड़ा दावा किया है कि “यह महिला शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद की करीबी है और किसी आतंकी संगठन की तरह हमले की जिम्मेदारी ले रही है। मामले की दिशा मोड़ने के लिए इसे निजी विवाद बताया जा रहा है, लेकिन सच यह है कि मुझ पर हमला शंकराचार्य ने ही कराया है।” दूसरी ओर, शंकराचार्य के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि स्वाति अघोरी नाम की महिला से उनका कोई संबंध नहीं है।
‘गौ यात्रा’ केवल दबाव बनाने का जरिया
आशुतोष ब्रह्मचारी ने उत्तर प्रदेश में गौ हत्या पहले से प्रतिबंधित होने का तर्क देते हुए कहा कि यह यात्रा केवल पुलिस और सरकार पर दबाव बनाने के लिए निकाली जा रही है ताकि पॉक्सो मामले के मुकदमे वापस हो जाएं। उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्य को वास्तव में गौ रक्षा की चिंता है, तो उन्हें केरल या उन राज्यों में जाना चाहिए जहां गौ हत्या पर प्रतिबंध नहीं है।
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