
यूनिक समय, वृंदावन। ब्रज में होली की खुमारी अब भी श्रद्धालुओं के सिर चढ़ कर बोल रही है। श्री रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रहमोत्सव में कांच के विमान पर सवार होकर जब ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान भक्तों के साथ होली खेलने निकले तो वातावरण में अबीर गुलाल की बदरी छा गई। होली की मस्ती में सराबोर होकर भक्तो ने भी अपने आराध्य के साथ जमकर होली खेली।
ब्रह्मोत्सव के छठवें दिन धवल श्वेत वस्त्र धारण किए ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान को वेदमंत्रों के साथ अर्चन कर प्राकृतिक अबीर गुलाल निवेदित किए गए। उसके बाद मंदिर के जगमोहन में चांदी की पिचकारी से भक्तो पर टेसू के फूलों से बने रंगों की बौछार की गई तो मंदिर परिसर रंगनाथ भगवान की जय जयकार से अनुगुंजित हो गया।
भगवान रंगनाथ जी कांच के विमान में सवार होकर मंदिर के सिंह द्वार पर पहुंचे तो भक्तों में गजब का उल्लास छा गया। जहां विमान से पुजारियों ने पिचकारी से रंग बरसाया वहीं अबीर गुलाल की बदरी के बीच गोविंद घेरा के क्षत्रिय समाज की महिलाओं ने भक्तो पर प्रेम पगी लाठियां बरसानी शुरू कर दी। ब्रज के पारंपरिक वस्त्रों में सजी महिलाओं की लाठियों से निकले प्रेम रस में भक्त सराबोर हो गए।
भगवान भास्कर की तपिश भी रस रंग में डूबे भक्तो के उल्लास को कम नहीं कर सका। जैसे जैसे सवारी बड़े बगीचे की तरफ बढ़ रही थी। रंगों की खुमारी भी अपने चरम पर पहुंच रही थी। लगभग तीन घंटे के बाद जब सवारी मंदिर परिसर वापस पहुंची तो मंदिर प्रबंधन द्वारा हुरंगा खेलने आई महिलाओं को ठाकुर जी का प्रसादी फगुआ भेंट किया गया।
बसंत पंचमी से शुरू हुआ होली उत्सव भगवान रंगनाथ के होली खेलने के साथ इस वर्ष के लिए विश्राम हो गया। भगवान रंगनाथ माता गोदा जी के साथ भक्तों पर रंग बरसा रहे थे तो भक्त होली के भजनों पर जमकर झूम रहे थे। भगवान की सवारी ने नगर भ्रमण किया तो हर तरह उत्साह,उल्लास और उमंग छा गया।
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