
यूनिक समय, नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकार ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और मनगढ़ंत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। क्षेत्रीय तनाव के बीच, राष्ट्रीय स्थिरता को खतरे में डालने के आरोप में कुल 35 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं, जिनमें 19 भारतीय नागरिक शामिल हैं। यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी (WAM) के अनुसार, इन सभी आरोपियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई (Fast-track Trial) सुनिश्चित की जाएगी।
अटॉर्नी जनरल का कड़ा रुख
यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमाद सैफ अल शम्सी ने देश की सुरक्षा और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए रविवार, 15 मार्च 2026 को 25 लोगों की गिरफ्तारी का नया आदेश जारी किया, जिनमें 17 भारतीय नागरिक शामिल हैं। यह कार्रवाई शनिवार को हुई 10 लोगों (2 भारतीयों सहित) की गिरफ्तारी के अतिरिक्त है, जिसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की गहन निगरानी के बाद अंजाम दिया गया है।
डॉ. शम्सी ने स्पष्ट किया कि इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य उन तत्वों पर लगाम लगाना है जो झूठी सूचनाएं फैलाकर सार्वजनिक अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित भ्रामक सामग्री का उपयोग कर राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।
आरोपियों का ‘मोडस ऑपरेंडी’
इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग और गहन जांच के माध्यम से यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित ‘मोडस ऑपरेंडी’ के तहत स्वयं को तीन अलग-अलग समूहों में बांटकर भ्रामक सामग्री साझा की थी। पहले समूह ने वास्तविक घटनाओं के वीडियो क्लिप्स को उनके मूल संदर्भ से काटकर इस तरह पेश किया जिससे जनता के बीच भ्रम और डर पैदा हो सके।
दूसरा समूह और भी खतरनाक रणनीति अपना रहा था, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर पूरी तरह से फर्जी वीडियो तैयार किए गए या विदेशों में हुई हिंसक वारदातों को यूएई के भीतर की घटना बताकर वायरल किया गया। वहीं, तीसरे समूह पर यह आरोप है कि वे सक्रिय रूप से एक शत्रुतापूर्ण देश और उसके सैन्य नेतृत्व का महिमामंडन कर रहे थे, जो सीधे तौर पर संयुक्त अरब अमीरात की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के विरुद्ध था।
क्षेत्रीय तनाव और सख्त कानून
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। यूएई प्रशासन ने पहले ही निवासियों और प्रवासियों को चेतावनी दी थी कि क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई भी अनसत्य या भ्रामक जानकारी साझा करना ‘साइबर क्राइम’ की श्रेणी में आएगा। यूएई का कानून सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर बेहद सख्त है, जिसमें भारी जुर्माने से लेकर लंबी कैद और निर्वासन (Deportation) तक के प्रावधान हैं।
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