
यूनिक समय, मथुरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के तीन दिवसीय ब्रज प्रवास को लेकर मथुरा प्रशासन किसी भी प्रकार की चूक नहीं चाहता। सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच सबसे अनोखी चुनौती वृंदावन के वो चतुर बंदर हैं, जो पलक झपकते ही चश्मा उड़ाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। राष्ट्रपति का चश्मा इन शरारती बंदरों की नजरों से बचाने के लिए प्रशासन ने अब एक खास ‘एंटी-मंकी’ प्लान तैयार किया है।
गुलेल, लाठी और लेजर लाइट से लैस होगी टीम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मथुरा-वृंदावन प्रवास के दौरान बंदरों के आतंक से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने वन विभाग के 30 विशेष कर्मचारियों की एक ‘एंटी-मंकी’ टीम तैनात की है, जो गुलेल, लाठी और डंडों से लैस होकर राष्ट्रपति के काफिले के पास आने वाले बंदरों को दूर खदेड़ने का काम करेगी। अधिकारियों की चिंता को देखते हुए इस सुरक्षा घेरे में हाई-टेक लेजर लाइट का भी समावेश किया गया है, जिसके तहत बंदरों की सघनता वाले संवेदनशील क्षेत्रों में 3 से 8 कर्मचारियों की छोटी टुकड़ियाँ लाल और हरे रंग की लेजर किरणों के माध्यम से शरारती बंदरों को डराकर राष्ट्रपति के चश्मे और अन्य सामान को सुरक्षित रखने का प्रयास करेंगी।
लंगूरों के ‘स्टेच्यू’ करेंगे सुरक्षा
वाइल्ड लाइफ नियमों के तहत असली लंगूरों के उपयोग पर लगे प्रतिबंध को देखते हुए प्रशासन ने एक नया मनोवैज्ञानिक रास्ता निकाला है, जिसके अंतर्गत बंदरों को डराकर दूर रखने के लिए वृंदावन के प्रमुख मार्गों और मंदिरों के आसपास लंगूरों के आदमकद स्टेच्यू (पुतले) लगाए जा रहे हैं। इन पुतलों को आज देर शाम या कल सुबह तक उन सभी संवेदनशील स्थानों पर स्थापित कर दिया जाएगा जहाँ बंदरों का अत्यधिक आतंक रहता है, ताकि लंगूर की उपस्थिति का आभास कराकर बंदरों को राष्ट्रपति के सुरक्षा घेरे से दूर रखा जा सके।
राष्ट्रपति का पूरा कार्यक्रम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तीन दिवसीय मथुरा-वृंदावन प्रवास का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित हो गया है, जिसकी शुरुआत 19 मार्च 2026 को उनके आगमन के साथ होगी। इस दौरे के पहले दिन राष्ट्रपति इस्कॉन (ISKCON) और प्रेम मंदिर में संध्या आरती में सम्मिलित होकर दर्शन-पूजन करेंगी, जबकि अगले दिन यानी 20 मार्च को वे प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज से भेंट करने के साथ-साथ नीम करोली बाबा और उड़िया बाबा के आश्रमों में जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी।
उसी दिन शाम को वे रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में नवनिर्मित अत्याधुनिक कैंसर ब्लॉक का उद्घाटन कर उसे जनता को समर्पित करेंगी और वात्सल्य ग्राम का भी दौरा करेंगी। अपने प्रवास के अंतिम दिन 21 मार्च को राष्ट्रपति गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर में दर्शन करेंगी और तत्पश्चात गोल्फ कार्ट के माध्यम से 21 किमी लंबी पावन गोवर्धन परिक्रमा पूर्ण कर दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।
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