
यूनिक समय, नई दिल्ली। राम नगरी अयोध्या के लिए आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। 19 मार्च 2026, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर 2083) और चैत्र नवरात्रि के पावन प्रथम दिन, प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के दूसरे तल पर दिव्य ‘श्री राम यंत्र’ की शास्त्रोक्त विधि-विधान से स्थापना कर दी गई है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं इस अलौकिक अनुष्ठान को संपन्न किया, जिसके साथ ही राम मंदिर के निर्माण कार्य को आज से पूर्ण और संपन्न माना गया है।
अभिजीत मुहूर्त में हुआ दिव्य यंत्र का अभिषेक
अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में सुबह से ही उत्सव का माहौल था। ठीक सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर, जब शुभ ‘अभिजीत मुहूर्त’ शुरू हुआ, राष्ट्रपति मुर्मू ने पुजारियों के गूंजते मंत्रोच्चार के बीच श्री राम यंत्र का पूजन किया। स्वर्ण आभा से चमकता यह ‘राम यंत्र’ देखने में अत्यंत दिव्य और अद्भुत है। पिछले आठ दिनों से अयोध्या में चल रहे ‘श्री सीताराम राम जानकी यज्ञ’ की पूर्णाहुति के रूप में इस यंत्र की प्रतिष्ठापना की गई।
सीएम योगी ने साझा किया भक्तिमय नजारा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या धाम के इस ऐतिहासिक और भक्तिमय क्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पूरे राष्ट्र को इसकी जानकारी दी। इस वीडियो में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूरी श्रद्धा के साथ हाथ में पूजन सामग्री का पात्र लिए हुए और दूब घास सहित अन्य पवित्र सामग्रियों को अपने माथे से लगाकर प्रभु के चरणों में अर्पित करते हुए दिखाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक ट्वीट में इस पल को राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरवशाली बताते हुए लिखा, “नव संवत्सर के पावन अवसर पर मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना।”
मंत्रोच्चार से गूंज उठा मंदिर प्रांगण
यंत्र स्थापना के दौरान राम मंदिर का कोना-कोना वैदिक ऋचाओं और शुभ मंत्रों से गूंज उठा। राष्ट्रपति ने अनुष्ठान के बाद भगवान रामलला के दर्शन किए और देश की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत देश के कई गणमान्य अतिथि और संत समाज उपस्थित रहा। पुजारियों ने बताया कि ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र होगी।
मंदिर निर्माण का ‘पूर्णता’ दिवस
22 जनवरी 2024 को हुई प्राण-प्रतिष्ठा के बाद, आज 19 मार्च 2026 को यंत्र स्थापना के साथ ही मंदिर के निर्माण की संरचनात्मक और आध्यात्मिक प्रक्रिया को पूर्ण माना गया है। यह नजारा इतना अद्भुत था कि वहां मौजूद हर भक्त भाव-विभोर हो गया। अब राम मंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ भक्तों के लिए एक पूर्ण तीर्थ के रूप में स्थापित हो चुका है।
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