यूनिक समय, नई दिल्ली। अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-2 (Artemis-II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से दुनिया के सबसे शक्तिशाली SLS (Space Launch System) रॉकेट ने भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे 'इंटीग्रिटी' नामक ओरियन कैप्सूल को लेकर अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। करीब 54 साल बाद यह पहला मौका है जब इंसान एक बार फिर चंद्रमा की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दी बधाई इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नासा की टीम और चारों अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई दी है। उन्होंने इस मिशन को 'अद्भुत' करार देते हुए कहा कि यह अमेरिका की अंतरिक्ष शक्ति और वैज्ञानिक कौशल का प्रमाण है। 2024 और 2025 में तकनीकी कारणों से कई बार टलने के बाद आखिरकार 1 अप्रैल (अमेरिकी समय) को इस मिशन ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में प्रवेश किया। मिशन की कमान और जांबाज अंतरिक्ष यात्री अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से दुनिया के सबसे शक्तिशाली SLS रॉकेट के जरिए आर्टेमिस-2 (Artemis-II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है, जिसके साथ ही इंसान करीब 54 साल बाद एक बार फिर चंद्रमा की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे हुई इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नासा की टीम और चारों अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई देते हुए इसे 'अद्भुत' करार दिया। इस मिशन की कमान रीड वाइसमैन संभाल रहे हैं, जिनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर और मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच व जेरेमी हैनसेन शामिल हैं; लॉन्चिंग के एक घंटे बाद 'इंटीग्रिटी' नामक ओरियन कैप्सूल पृथ्वी की ऊंची कक्षा में स्थापित हो गया है, जहाँ से कमांडर वाइसमैन ने सूर्योदय का संदेश भेजा और क्रिस्टीना कोच ने शुरुआती चरण में ही यान के टॉयलेट सिस्टम को दुरुस्त कर 10 दिनों की यात्रा को सुगम बनाने का मोर्चा संभाला। चांद की परिक्रमा और 'ऑर्गन-ऑन-ए-चिप' तकनीक आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री करीब 4.06 लाख किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर चंद्रमा की सतह पर उतरे बिना उसके बेहद करीब से परिक्रमा कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे; इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान वैज्ञानिक 'ऑर्गन-ऑन-ए-चिप' तकनीक का उपयोग कर गहरे अंतरिक्ष के खतरनाक रेडिएशन से इंसानी शरीर और डीएनए (DNA) पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन अध्ययन करेंगे, जो भविष्य के 'मंगल मिशन' के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। वर्तमान में अंतरिक्ष यात्री अगले 25 घंटों तक कैप्सूल के सभी लाइफ-सपोर्ट सिस्टम की बारीकी से जांच कर रहे हैं, जिसके बाद वे चांद की ओर अपनी मुख्य यात्रा शुरू करेंगे; यह मिशन सीधे तौर पर आर्टेमिस-3 के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिसमें अंततः इंसान एक बार फिर चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: 1 अप्रैल से भारत आने वाले विदेशियों के लिए ‘ई-अराइवल कार्ड’ हुआ अनिवार्य; 72 घंटे पहले करना होगा ऑनलाइन आवेदन [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]