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1 अप्रैल से भारत आने वाले विदेशियों के लिए ‘ई-अराइवल कार्ड’ हुआ अनिवार्य; 72 घंटे पहले करना होगा ऑनलाइन आवेदन

by Tarun Bhardwaj • April 1, 2026
'E-Arrival Card' Becomes Mandatory for Foreigners Visiting India

1 अप्रैल से भारत आने वाले विदेशियों के लिए ‘ई-अराइवल कार्ड’ हुआ अनिवार्य; 72 घंटे पहले करना होगा ऑनलाइन आवेदन

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यूनिक समय, नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, विशेषकर विदेशी नागरिकों के लिए प्रवेश नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब भारत आने वाले सभी विदेशी यात्रियों के लिए ‘ई-अराइवल कार्ड’ (E-Arrival Card) जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया डिजिटल सिस्टम पुराने कागजी ‘डिसएम्बार्केशन फॉर्म’ (Form D) की जगह लेगा, जिसे पहले फ्लाइट के भीतर हाथ से भरना पड़ता था।

क्या है ई-अराइवल कार्ड और क्यों है जरूरी?

ई-अराइवल कार्ड एक महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज है जो भारत के आधिकारिक इमिग्रेशन डेटाबेस से सीधे तौर पर लिंक होता है और इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी यात्रियों की प्रवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज व पारदर्शी बनाना है; नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भारत में लैंड करने से कम से कम 72 घंटे पहले इसे ऑनलाइन भरकर जमा करना अनिवार्य है, जिसके बाद उन्हें एक QR कोड प्राप्त होगा जिसे भारत पहुंचने पर एयरपोर्ट के इमिग्रेशन काउंटर पर स्कैन करवाना होगा।

कैसे करें आवेदन?

  • विदेशी नागरिक इस कार्ड को प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
  • भारत सरकार की वेबसाइट indianvisaonline.gov.in पर जाएं।
  • ‘इंडियन वीजा सु-स्वागतम’ (Indian Visa Su-Swagatam) ऐप का इस्तेमाल करें।
  • फॉर्म में यात्री की मूल जानकारी, पासपोर्ट नंबर, फ्लाइट डिटेल्स, संपर्क विवरण और यात्रा का उद्देश्य भरना होगा।
  • जानकारी सबमिट करते ही एक वेरिफिकेशन QR कोड जेनरेट होगा। इसे अपने फोन में सुरक्षित रखें या प्रिंट ले लें।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

ई-अराइवल कार्ड के संबंध में यह स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है कि यह वैध वीजा या OCI कार्ड का विकल्प नहीं है, बल्कि भारत में प्रवेश के लिए यात्रियों के पास इन दस्तावेजों का होना पूर्ववत अनिवार्य बना रहेगा; साथ ही, अब विमान के भीतर मिलने वाले पुराने कागजी फॉर्म की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है, इसलिए यदि कोई यात्री लैंडिंग से 72 घंटे पहले इसे ऑनलाइन जमा नहीं करता है, तो उसे इमिग्रेशन क्लियरेंस में गंभीर देरी का सामना करना पड़ सकता है।

केंद्र सरकार की यह क्यूआर कोड आधारित पहल न केवल यात्रियों को एयरपोर्ट की लंबी कतारों से मुक्ति दिलाकर सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को एक डिजिटल-फर्स्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।

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