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Mathura News: संत प्रेमानंद महाराज को ‘बांकेबिहारी’ दिखाने पर विवाद; ब्राह्मण सभा ने जताई कड़ी आपत्ति

by Tarun Bhardwaj • April 3, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। कान्हा की नगरी वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्टर ने ब्रज में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पोस्टर में महाराज जी को साक्षात ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी के रूप में चित्रित किया गया है, जिस पर अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। महासभा ने इसे ब्रज की प्राचीन परंपराओं और करोड़ों भक्तों के आराध्य का अपमान बताया है।

“आराध्य की बराबरी कोई संत नहीं कर सकता”

अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा के ब्रज प्रदेश अध्यक्ष पं. बिहारी लाल वशिष्ठ और महामंत्री राजेश पाठक ने विवादित पोस्टर की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि श्रीबांकेबिहारी जी ब्रज के सर्वोपरि आराध्य हैं और ब्रह्मांड का कोई भी संत या मनुष्य उनकी बराबरी नहीं कर सकता; उन्होंने इस कृत्य को मर्यादा का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति विशेष को आराध्य के रूप में दिखाना न केवल शास्त्र सम्मत परंपराओं के विरुद्ध है, बल्कि ऐसे अतिवादी प्रयास स्वयं संत प्रेमानंद महाराज की सात्विक और सम्मानित छवि को भी गहरा नुकसान पहुँचाते हैं।

दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी

परशुराम शोभा यात्रा समिति के महामंत्री राम प्रकाश शर्मा और जिला उपाध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बताया कि विवादित पोस्ट डालने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान की जा रही है। महासभा ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस भ्रामक प्रचार में लिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रेमानंद महाराज के प्रबंधन और सरकार से अपील

अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा ने संत प्रेमानंद महाराज के प्रबंधन (पर्रिकर) से अपने अनुयायियों को उचित दिशा-निर्देश जारी करने का निवेदन किया है ताकि भविष्य में श्रद्धा के अतिरेक में मर्यादित सीमाओं का उल्लंघन न हो; साथ ही, सभा ने उत्तर प्रदेश सरकार से देवी-देवताओं के अपमान को रोकने हेतु प्रदेश में एक सख्त ईश-निंदा विरोधी कानून बनाने की पुरजोर मांग की है।

ब्रज के धार्मिक हलकों में इस पोस्टर को लेकर व्याप्त भारी रोष के बीच भक्तों का स्पष्ट मानना है कि संतों के प्रति अटूट श्रद्धा के बावजूद उन्हें साक्षात भगवान के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।

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