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कानपुर किडनी कांड: 12वीं पास मुदस्सर अली बना मौत का सौदागर; डॉक्टर बन किए 13 किडनी ट्रांसप्लांट, दो की गई जान

by Tarun Bhardwaj • April 22, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने चिकित्सा जगत के भरोसे को तार-तार कर दिया है। कानपुर पुलिस की गिरफ्त में आए मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ ‘डॉक्टर अली’ ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, वे रूह कंपा देने वाले हैं। जिस शख्स के हाथ में मरीजों ने अपनी जिंदगी सौंपी, वह असल में कोई डॉक्टर नहीं बल्कि महज 12वीं पास एक ओटी मैनेजर निकला, जिसने पैसों की हवस में 13 लोगों के शरीर पर सर्जिकल चाकू चलाया।

बिना डिग्री 13 ऑपरेशन

पुलिस रिमांड के दौरान मुदस्सर अली ने कबूल किया कि उसने अब तक 13 किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं। इनमें से 3 ऑपरेशन मेरठ में और 10 कानपुर के विभिन्न प्रतिष्ठित अस्पतालों में अंजाम दिए गए। मूल रूप से दिल्ली निवासी अली मेरठ के अल्फा अस्पताल में ओटी मैनेजर था। वहीं उसने डॉक्टरों को देखकर अवैध तरीके से ऑपरेशन करने के ‘दांव-पेच’ सीखे और खुद को ‘डॉक्टर अली’ के रूप में स्थापित कर लिया।

मौत का खेल

इस अवैध धंधे का सबसे काला पक्ष यह है कि अली द्वारा किए गए ऑपरेशनों के बाद दो मरीजों की मौत हो गई। रमाशिव अस्पताल में एक पुरुष मरीज की ट्रांसप्लांट के बाद जान चली गई थी। वही मेडलाइफ अस्पताल में एक महिला का ट्रांसप्लांट किया गया, जिसकी स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

नामी अस्पतालों के ‘डेथ बेड’ का नेटवर्क

जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि आरोपी मुदस्सर अली ने रोहित तिवारी के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था, जिसने कानपुर के आहूजा अस्पताल (केशवपुरम्), मेडलाइफ अस्पताल और रमाशिव अस्पताल (स्वरूप नगर) जैसे प्रमुख चिकित्सा केंद्रों को अपने अवैध किडनी प्रत्यारोपण नेटवर्क का ठिकाना बनाकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया।

अब तक 11 गिरफ्तार

रावतपुर थाने में दर्ज एफआईआर के बाद शुरू हुई इस जांच में अब तक एक डॉक्टर दंपती समेत 11 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। मुदस्सर अली को 16 मार्च को गुपचुप तरीके से कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया था, जिसके बाद पुलिस ने रिमांड लेकर यह चौंकाने वाली जानकारियां हासिल की हैं।

अब पुलिस इस गैंग के मुख्य सरगना रोहित और दलाल शिवम अग्रवाल को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं और अभी कई और ‘सफेदपोश’ चेहरे बेनकाब होना बाकी हैं।

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