यूनिक समय, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के अस्तित्व के लिए आज का दिन सबसे बड़े राजनीतिक संकट के रूप में सामने आया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सीधी बगावत करते हुए 'आप' से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ पार्टी के कुल 7 सांसदों ने एक साथ भाजपा (BJP) का दामन थामने का ऐलान किया है, जिससे दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में भूचाल आ गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में धमाका दिल्ली में आयोजित एक नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मंच पर मौजूद रहे। राघव चड्ढा ने कहा, "जिस पार्टी को मैंने अपनी जवानी के 15 साल दिए और खून-पसीने से सींचा, वह आज अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है। यह पार्टी अब राष्ट्रहित के बजाय निजी फायदों के लिए काम कर रही है। मुझे लंबे समय से लग रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूँ।" संविधान के तहत विलय का दांव राघव चड्ढा ने दावा किया कि यह केवल इस्तीफा नहीं है, बल्कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के विधायी दल का भाजपा में विलय है। राघव चड्ढा ने कहा कि उनके साथ दो-तिहाई (7 सांसद) सदस्य हैं, इसलिए संविधान के प्रावधानों के तहत उनकी सदस्यता रद्द नहीं होगी और वे विधिवत भाजपा का हिस्सा बनेंगे। राघव चड्ढा के अलावा इस बगावत में संदीप पाठक, अशोक मित्तल, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे दिग्गज शामिल हैं। संदीप पाठक का हमला आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक ने भी बगावत के सुर तेज करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अरविंद केजरीवाल और पार्टी को खुद से आगे रखा, लेकिन जब पार्टी अपने ही सिद्धांतों को भूल गई, तो उनके पास अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। बीजेपी में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरे: राघव चड्ढा (राज्यसभा सांसद) संदीप पाठक (राज्यसभा सांसद एवं रणनीतिकार) अशोक मित्तल (राज्यसभा सांसद) हरभजन सिंह (राज्यसभा सांसद एवं पूर्व क्रिकेटर) राजेंद्र गुप्ता (सांसद) विक्रमजीत सिंह साहनी (सांसद) स्वाति मालीवाल (राज्यसभा सांसद) क्या होगा आम आदमी पार्टी का भविष्य? इस बगावत ने न केवल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ताकत को लगभग खत्म कर दिया है, बल्कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े स्तर पर सांसदों का पलायन 'आप' के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका है, जो आने वाले चुनावों में पार्टी की स्थिति को कमजोर कर सकता है। फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह बगावत पंजाब और दिल्ली की सरकारों पर भी असर डालेगी। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: बंगाल चुनाव 2026: “बुझने से पहले फड़फड़ा रहा है TMC का दीया”, पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग के बाद गरजे पीएम मोदी [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]