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मथुरा में बैंक हड़ताल का दिखा बड़ा असर; बैंककर्मियों की हुंकार से करोड़ों का कारोबार प्रभावित, फिर आंदोलन की चेतावनी

by Tarun Bhardwaj • September 11, 2026
Bank strike has a major impact in Mathura

मथुरा में बैंक हड़ताल का दिखा बड़ा असर; बैंककर्मियों की हुंकार से करोड़ों का कारोबार प्रभावित, फिर आंदोलन की चेतावनी

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यूनिक समय, मथुरा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियनों (UFBU) के आह्वान पर शुक्रवार को देशव्यापी बैंक हड़ताल का असर धार्मिक नगरी मथुरा में व्यापक रूप से देखने को मिला। दोपहर लगभग 3 बजे से जिले भर के सभी सरकारी बैंकों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया, जिससे करोड़ों रुपये का वित्तीय लेनदेन और कारोबारी गतिविधियां अचानक थम गईं।

प्रमुख सरकारी बैंकों में लटके ताले

हड़ताल के कारण भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक और इंडियन बैंक सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में ताले लटके नजर आए। कार्य बहिष्कार के चलते नकद जमा एवं निकासी, चेक क्लीयरेंस, डिमांड ड्राफ्ट और लोन प्रोसेसिंग जैसी सामान्य व दैनिक बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं।

बैंकिंग काम ठप होने से आम ग्राहकों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों और उद्योगपतियों को भी लेन-देन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

कर्मचारी नेताओं की अगुवाई में जोरदार प्रदर्शन

जिले में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व यूएफबीयू मथुरा के संयोजक जगमोहन शर्मा और केनरा बैंक अधिकारी संगठन के क्षेत्रीय सचिव भूपेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर जितेंद्र शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, बामन जी चतुर्वेदी, यतेंद्र गौतम, शोभित वर्मा, अरविंद त्रिपाठी और जीतू दिवाकर सहित बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में हुंकार भरी।

ये हैं बैंककर्मियों की मुख्य मांगें

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार लंबे समय से बैंक कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। कर्मचारियों ने बैंकों में सप्ताह में 5 दिन काम (5-Day Work Week) की व्यवस्था तुरंत लागू करने की मांग की है।

इसके साथ ही वेतन पुनरीक्षण एवं भत्तों से जुड़ी विसंगतियों का शीघ्र निस्तारण करने का मुद्दा भी उठाया गया है। साथ ही नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त कर कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) को पुनः बहाल करने पर जोर दिया गया है।

मांगें न मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

यूएफबीयू की योजना के अनुसार, मांगे न पूरी होने पर 28 से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। इसके बावजूद भी कोई समाधान न निकलने की स्थिति में 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का कड़ा फैसला लिया गया है।

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यह भी पढ़े: India Russia Relations: भारत मंडपम में पीएम मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता संपन्न; 45 मिनट तक अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

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