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Bhagat Chunni Lal Died: पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भगत चुन्नी लाल का 94 वर्ष की उम्र में निधन

by Tarun Bhardwaj • September 10, 2026
Bhagat Chunni Lal Died

Bhagat Chunni Lal Died: पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भगत चुन्नी लाल का 94 वर्ष की उम्र में निधन

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यूनिक समय, नई दिल्ली। पंजाब के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता भगत चुन्नी लाल का गुरुवार सुबह निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने जालंधर के बस्ती क्षेत्र स्थित अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली। वे आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मौजूदा मंत्री मोहिंदर भगत के पिता थे। उनका अंतिम संस्कार आज शाम करीब 5 बजे बस्ती शेख श्मशान घाट पर किया जाएगा।

सियालकोट से जालंधर तक का सफर

भगत चुन्नी लाल का जन्म 1 दिसंबर 1932 को विभाजन पूर्व सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान उनका परिवार जालंधर आकर बस गया। राजनीति में पूर्ण रूप से सक्रिय होने से पहले उन्होंने स्पोर्ट्स गुड्स (खेल सामग्री) के निर्यात का सफल कारोबार स्थापित किया। उनके परिवार में चार बेटे और चार बेटियां हैं।

राजनीतिक सफर

भगत चुन्नी लाल ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में जालंधर दक्षिण सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की थी, हालांकि पहले चुनाव में सफलता न मिलने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और आगे चलकर जालंधर वेस्ट क्षेत्र की राजनीति के प्रमुख चेहरा बने। इसके बाद वे 1997 में पहली बार जालंधर दक्षिण सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए और फिर 2007 में इसी सीट से दूसरी बार जीत दर्ज की, जो बाद में परिसीमन के कारण जालंधर पश्चिम क्षेत्र के नाम से जानी गई। वर्ष 2012 के चुनाव में भी उन्होंने जालंधर पश्चिम से जीत हासिल कर तीसरी बार विधानसभा में प्रवेश किया।

पंजाब सरकार और संगठन में निभाईं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

अपने सुदीर्घ राजनीतिक जीवन में भगत चुन्नी लाल ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विधायी पदों की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2011 में सतपाल गोसाईं के इस्तीफे के बाद उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) चुना गया था। इसके बाद वर्ष 2012 से 2017 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार में उन्होंने स्थानीय निकाय, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, श्रम तथा वन एवं वन्यजीव जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभाला। इसी कार्यकाल में वर्ष 2012 से 2017 तक वे पंजाब विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता के रूप में भी सेवाएँ देते रहे।

वर्ष 2017 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी और चुनाव न लड़ने का फैसला किया था। उनके निधन पर पंजाब के राजनीतिक हलकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

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