Wed, Jul 15th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

Breaking News: 13 साल के संघर्ष के बाद कोमा में जीवन बिताने वाले हरीश राणा ने एम्स में ली अंतिम सांस

by Tarun Bhardwaj • March 24, 2026
Harish Rana breathed his last at AIIMS

Breaking News: 13 साल के संघर्ष के बाद कोमा में जीवन बिताने वाले हरीश राणा ने एम्स में ली अंतिम सांस

इस खबर को सुनें • हिंदी

00:00
00:00
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। देश में ‘निष्क्रिय इच्छा मृत्यु’ (Passive Euthanasia) की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में निधन हो गया है। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा के जीवन का अंत उस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हुआ, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें गरिमा के साथ विदा होने की अनुमति दी थी।

एक दर्दनाक हादसे से कोमा तक का सफर

हरीश राणा के इस लंबे संघर्ष की शुरुआत साल 2013 में हुई थी, जब वे चंडीगढ़ में अपनी पढ़ाई कर रहे थे। एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के दौरान वे अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और वे 100 फीसदी दिव्यांगता का शिकार होकर अचेत अवस्था में चले गए। पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर गहरे घाव बन गए थे और उनके माता-पिता ने बेटे को इस अपार कष्ट में देखकर अंततः न्यायालय से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई थी।

भारत की सर्वोच्च अदालत ने 11 मार्च को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी अमानवीय पीड़ा और सुधार की शून्य संभावना के बीच जीवित रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने इसे एक कठिन फैसला बताते हुए स्पष्ट किया था कि हरीश को पैलिएटिव केयर में रखकर मेडिकल ट्रीटमेंट वापस लिया जाए ताकि उनकी विदाई गरिमापूर्ण हो। इसी आदेश के तहत 14 मार्च को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे उनका न्यूट्रिशनल सपोर्ट और लिक्विड डाइट बंद कर दी गई।

अंतिम विदाई

एम्स के डॉक्टरों ने सुनिश्चित किया कि हरीश की अंतिम यात्रा बिना किसी शारीरिक पीड़ा के पूरी हो। इसके लिए उन्हें निरंतर दर्द कम करने वाली दवाएं दी जा रही थीं। पिछले लगभग 10 दिनों से भोजन और पानी बंद होने के बाद, शरीर के जीवन रक्षक अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया और आज उन्होंने अंतिम सांस ली। यह मामला न केवल भारत में इच्छा मृत्यु के कानूनी प्रावधानों की पुष्टि करता है, बल्कि एक परिवार के उस लंबे धैर्य और प्रेम का भी साक्षी बना जिसने अपने बेटे की असहनीय पीड़ा को समाप्त करने के लिए एक कठिन लेकिन साहसी निर्णय लिया।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: India News: पीएम मोदी का राज्यसभा से बड़ा एलान; ऊर्जा संकट के बीच 70,000 करोड़ की ‘स्वदेशी जहाज’ परियोजना शुरू

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.

मथुरा-वृन्दावन में बढ़ा यमुना का जलस्तर मथुरा में विवादित होर्डिंग्स पर भड़का आक्रोश सोनम वांगचुक का वज़न 8.5 किलो घटा; बिगड़ती सेहत देख भावुक हुआ बॉलीवुड JFK एयरपोर्ट और ABB से करार के बाद TCS के शेयरों में जबरदस्त तेजी चुनाव आयोग ने शुरू की SIR के तहत ऑनलाइन इन्यूमिरेशन फॉर्म जमा करने की सुविधा होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमले में भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार का बड़ा एक्शन सितंबर में लॉन्च हो सकती है Apple iPhone 18 Pro सीरीज अमेरिका ने ईरान के 6 ठिकानों पर की 5 घंटे तक भीषण एयरस्ट्राइक