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Breaking News: ईरान की सत्ता पर IRGC का पूर्ण कब्जा; मुज्तबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने प्रमुख निर्णयकर्ता

by Tarun Bhardwaj • April 20, 2026
IRGC's Complete Seizure of Power in Iran

Breaking News: ईरान की सत्ता पर IRGC का पूर्ण कब्जा; मुज्तबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने प्रमुख निर्णयकर्ता

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यूनिक समय, नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र से एक अत्यंत चौंकाने वाली और वैश्विक राजनीति को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान की सत्ता पर अब कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है। ‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुए नाटकीय घटनाक्रम के बाद देश की सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक फैसले लेने की प्रक्रिया अब सीधे IRGC के हाथों में आ गई है।

प्रमुख नेतृत्व में बदलाव

इस सत्ता परिवर्तन के तहत IRGC कमांडर अहमद वाहिदी और उनके करीबियों ने शासन की धुरी संभाल ली है। ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ के अनुसार उदारवादी माने जाने वाले विदेश मंत्री अब्बास अराघची को लगभग शक्तिहीन कर दिया गया है। अराघची ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का संकेत दिया था, लेकिन IRGC ने तुरंत इस फैसले को पलट दिया और नाकेबंदी जारी रखने का आदेश दिया।

मुज्तबा खामेनेई का उदय

रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब ईरान के सर्वोच्च नेता के पुत्र मुज्तबा खामेनेई और कमांडर वाहिदी ही देश के प्रमुख निर्णयकर्ता हैं। ईरान की वार्ता टीम को अचानक तेहरान वापस बुला लिया गया है। आरोप है कि अराघची ने ‘प्रतिरोध की धुरी’ (Axis of Resistance) के मुद्दे पर लचीला रुख अपनाकर IRGC के निर्देशों का उल्लंघन किया था। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र अब पूरी तरह IRGC के एजेंडे को लागू करवा रहे हैं।

होर्मुज में तनाव

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति अब युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। हाल ही में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खाड़ी में नाकेबंदी के कारण सैकड़ों मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन ठप होने का खतरा पैदा हो गया है। जवाब में अमेरिका ने ईरान के एक कार्गो शिप को अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे तनाव चरम पर पहुँच गया है।

वार्ता की संभावनाएं खत्म?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता में इस बदलाव के बाद पश्चिमी देशों के साथ बातचीत की मेज अब लगभग टूट चुकी है। वाशिंगटन का यह दावा कि बड़े अधिकारियों के मारे जाने के बाद ईरान नरम पड़ा है, पूरी तरह गलत साबित हुआ है। अराघची और गालिबफ जैसे नेताओं के पास अब नीति प्रभावित करने का कोई अधिकार नहीं बचा है।

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