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डोनाल्ड ट्रंप ने 6 भारतीय सहित 24 कंपनियों पर ईरान से तेल खरीदने पर लगाया प्रतिबंध

by Tarun Bhardwaj • July 31, 2025
डोनाल्ड ट्रंप ने लगाया प्रतिबंध

डोनाल्ड ट्रंप ने 6 भारतीय सहित 24 कंपनियों पर ईरान से तेल खरीदने पर लगाया प्रतिबंध

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यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार देर रात ईरान से प्रतिबंधित रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने वाली 24 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए। इनमें 6 भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा, चीन की 7, यूएई की 6, हांगकांग की 3, तुर्की और रूस की 1-1 कंपनियां भी शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने इन प्रतिबंधों की घोषणा की। मंत्रालय का कहना है कि इन कंपनियों ने 2024 में यूएई के ज़रिए 1000 करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य के ईरानी उत्पाद आयात किए। ईरान इस पैसे से अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है और आतंकवाद को वित्तपोषित कर रहा है। मंत्रालय ने इसे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन बताया है।

6 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध: –

  1. अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड: इस पर सबसे बड़ा आरोप है। कंपनी ने जनवरी और दिसंबर 2024 के बीच 84 मिलियन डॉलर (करीब 700 करोड़ रुपये) से ज़्यादा मूल्य के ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया।
  2. ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड: जुलाई 2024 से जनवरी 2025 तक, कंपनी ने 51 मिलियन डॉलर (करीब 425 करोड़ रुपये) से ज़्यादा मूल्य के ईरानी मेथेनॉल और अन्य उत्पाद खरीदे।
  3. जुपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड: इसी अवधि के दौरान, कंपनी ने लगभग 49 मिलियन डॉलर मूल्य के टोल्यूनि सहित ईरानी उत्पादों का आयात किया।
  4. रमानिकलाल एस. गोसालिया एंड कंपनी: इसने मेथेनॉल और टोल्यूनि सहित लगभग 22 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोकेमिकल खरीदे।
  5. पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड: अक्टूबर और दिसंबर 2024 के बीच, कंपनी ने 14 मिलियन डॉलर मूल्य के ईरानी मेथेनॉल का आयात किया।
  6. कंचन पॉलिमर्स: इस पर 1.3 मिलियन डॉलर मूल्य के ईरानी पॉलीएथिलीन उत्पाद खरीदने का आरोप है।

ये प्रतिबंध ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की अमेरिकी नीति का हिस्सा हैं। अमेरिका का दावा है कि ईरान अपने तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय का इस्तेमाल मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने और आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के लिए करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि प्रतिबंधों का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाना है। प्रतिबंधित कंपनियाँ चाहें तो अमेरिकी वित्त विभाग से प्रतिबंध हटाने के लिए आवेदन कर सकती हैं।

भारत के अलावा, इस कार्रवाई में तुर्की, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया की कुछ कंपनियाँ भी निशाने पर हैं। अमेरिका के अनुसार, ये कंपनियाँ ईरान के तेल व्यापार में सहयोग कर रही थीं।

अमेरिका में इन कंपनियों की सभी संपत्तियाँ और अमेरिकी नागरिकों/कंपनियों के साथ उनके लेन-देन तुरंत ज़ब्त कर लिए गए हैं। कोई भी अमेरिकी व्यक्ति या कंपनी इन प्रतिबंधित कंपनियों के साथ व्यापार नहीं कर सकती। इसके अलावा, अन्य कंपनियाँ जिनमें इन कंपनियों की 50% से अधिक हिस्सेदारी है, वे भी इन प्रतिबंधों के दायरे में आएंगी।

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