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CBSE ‘थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी’ पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा ऐलान; 7वीं से 9वीं वालों को बड़ी राहत

by Tarun Bhardwaj • June 26, 2026
CBSE 'Three-Language Policy'

CBSE ‘थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी’ पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा ऐलान; 7वीं से 9वीं वालों को बड़ी राहत

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यूनिक समय, नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के स्कूलों में नई ‘थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी’ (तीन भाषाओं वाली नीति) को लेकर पिछले कुछ दिनों से छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्कूल संचालकों के बीच बना असमंजस अब पूरी तरह खत्म हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस नीति को लेकर चल रहे भ्रम को पूरी तरह दूर करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि तीन भाषाओं का यह नया नियम केवल उन छात्रों पर लागू होगा, जो इस शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 (छठी क्लास) में नया एडमिशन ले रहे हैं। इस फैसले से देश भर के लाखों विद्यार्थियों और उनके पैरेंट्स ने बड़ी राहत की सांस ली है।

कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को बड़ी राहत

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि सीबीएसई द्वारा पहले जारी किया गया नोटिस पूरी तरह स्पष्ट नहीं था, जिसके कारण व्यापक स्तर पर कन्फ्यूजन पैदा हो गया था। अब उस उलझन को दूर कर दिया गया है। जो छात्र वर्तमान में कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपने मौजूदा भाषा विषयों (Language Subjects) को बीच सत्र में बदलने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होगी।

शिक्षा मंत्री के मुताबिक, जो छात्र अभी दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, वे अपनी 10वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाओं तक उन्हीं विषयों की पढ़ाई बेझिझक जारी रख सकते हैं। यह नई नीति पिछली तारीख (बैक डेट) से उन छात्रों पर थोपी नहीं जाएगी जो पहले से ही उच्च कक्षाओं में अपनी भाषा चुनकर आगे बढ़ चुके हैं।

क्या है नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार की गई इस नई व्यवस्था के अनुसार, इस साल कक्षा 6 में प्रवेश करने वाले छात्रों के लिए अपनी तीन भाषाओं के विकल्प में कम से कम 2 भारतीय भाषाओं को शामिल करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, स्कूली स्तर पर भाषाई बाधा को दूर करने के लिए शिक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि छात्रों को क्लास के हिसाब से सभी आवश्यक पाठ्यपुस्तकें संविधान की 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएंगी।

स्कूलों में इन क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं को सुचारू रूप से पढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधन और योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करने की पूरी जिम्मेदारी सीबीएसई को सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, नए फ्रेमवर्क में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को हर साल 110 घंटे का स्किल मॉड्यूल पूरा करना होगा, जबकि कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए एक स्किल सब्जेक्ट चुनना पूरी तरह अनिवार्य रहेगा।

संशोधित आधिकारिक आदेश जल्द

इस मामले में पैरेंट्स और स्कूलों द्वारा बोर्ड के हालिया कम्युनिकेशन पर गहरी चिंता जताए जाने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने यह त्वरित हस्तक्षेप किया है। दरअसल, पहले स्कूलों को जुलाई से ही इसे पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया गया था, जिससे हड़कंप मच गया था।

अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीएसई अपनी गवर्निंग काउंसिल की आगामी बैठक के बाद जल्द ही एक संशोधित आधिकारिक गाइडलाइन और आदेश जारी करेगा। इसके अतिरिक्त, सीबीएसई इस बात पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है कि क्या कक्षा 10 तक जरूरी वोकेशनल सब्जेक्ट की जगह छात्रों को किसी विदेशी भाषा को चुनने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। इस विशिष्ट प्रस्ताव पर फिलहाल बोर्ड के नीति निर्धारकों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है।

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