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India New Zealand FTA: 100% भारतीय निर्यात अब होगा ‘टैरिफ-मुक्त’; कई उत्पादों को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार

by Tarun Bhardwaj • April 27, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड ने आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत करते हुए सोमवार को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दिया गया। यह समझौता न केवल व्यापार की बाधाओं को दूर करेगा, बल्कि भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में एक नई पहचान और मजबूती प्रदान करेगा।

भारतीय निर्यात के लिए ‘जीरो-टैरिफ’ की सौगात

इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि न्यूजीलैंड अब भारत के 100 प्रतिशत निर्यात को टैरिफ-मुक्त (शुल्क-मुक्त) पहुंच प्रदान करेगा। वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा। पहले न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों (जैसे सिरेमिक, कालीन, ऑटो पार्ट्स) पर 10% तक का टैरिफ लगाता था। अब बिना किसी शुल्क के, भारतीय सामान वहां अन्य देशों के उत्पादों के साथ बेहतर ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। निर्यात बढ़ने से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSMEs) को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उत्पादन लागत में कमी

समझौते के तहत भारत को न्यूजीलैंड से लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं के कबाड़ जैसे कच्चे माल अब शुल्क-मुक्त मिलेंगे। इससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की उत्पादन लागत कम होगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय सामान और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

डेयरी और कृषि क्षेत्र सुरक्षित

भारत ने अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था और किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। भारत ने 29.97 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों को इस समझौते से बाहर रखा है। इसमें मुख्य रूप से डेयरी उत्पाद (दूध, पनीर, क्रीम), प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी, शहद और हथियार जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। इन पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है।

भारत न्यूजीलैंड की करीब 30% श्रेणियों पर शुल्क तुरंत समाप्त करेगा, जबकि अन्य 35.60% श्रेणियों (जैसे पेट्रोलियम तेल, मशीनरी) पर अगले 3 से 10 वर्षों में धीरे-धीरे शुल्क कम किया जाएगा।

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। व्यापार और निवेश में संतुलन बनाए रखने के लिए इसमें एक विशेष ‘रीबैलेंसिंग क्लॉज’ भी जोड़ा गया है, जो निवेश लक्ष्य पूरे न होने की स्थिति में दोनों देशों को सामंजस्य बिठाने का अधिकार देगा।

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