यूनिक समय, नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश Justice Yashwant Varma ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले एक साल से 'कैशकांड' और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे जस्टिस वर्मा का यह इस्तीफा उस समय आया है, जब उनके खिलाफ संसद में महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर थी। उनके दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में भारी मात्रा में जले हुए नोट मिलने के बाद से वह न्यायिक कार्यों से अलग कर दिए गए थे। क्या है पूरा मामला? Justice Yashwant Varma का विवादों से नाता 22 मार्च 2025 को तब शुरू हुआ जब उनके दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में 500-500 रुपये के जले हुए नोट मिले, जिसके बाद 24 मार्च को तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने उनसे सभी न्यायिक कार्य छीन लिए; इसके उपरांत 5 अप्रैल को उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया और जुलाई-अगस्त 2025 में राहुल गांधी व रविशंकर प्रसाद सहित 146 सांसदों द्वारा दिए गए महाभियोग नोटिस को स्पीकर ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया। जांच पैनल की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन जजों के पैनल की 64 पन्नों की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसमें दमकल अधिकारी मनोज मेहलावत सहित 10 गवाहों ने जलते नोटों की पुष्टि की और एक वायरल वीडियो में "महात्मा गांधी में आग लग रही है" जैसी आवाज़ की फोरेंसिक पुष्टि भी हुई; साथ ही पैनल ने जस्टिस वर्मा के इस दावे को "अविश्वसनीय" करार दिया कि सीसीटीवी काम नहीं कर रहे थे, और यह निष्कर्ष निकाला कि हमेशा लॉक रहने वाले स्टोर रूम पर उनके परिवार का पूर्ण नियंत्रण था, जिसका वे कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दे सके। महाभियोग की प्रक्रिया और अंत लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित जांच समिति (जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य) इस मामले की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही थी। महाभियोग की कार्यवाही के दौरान जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति के सामने तर्क दिया कि उन्हें फंसाया जा रहा है और सुरक्षा कर्मियों ने मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। हालांकि, साक्ष्यों के भारी दबाव और संसद में सर्वदलीय सहमति को देखते हुए, जस्टिस वर्मा ने रिपोर्ट आने और महाभियोग की वोटिंग होने से पहले ही इस्तीफा देना बेहतर समझा। Justice Yashwant Varma का करियर प्रोफाइल 57 वर्षीय जस्टिस यशवंत वर्मा ने 8 अगस्त 1992 को वकालत की शुरुआत की थी, जिसके बाद 13 अक्टूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 1 फरवरी 2016 को स्थायी जज नियुक्त किया गया; अक्टूबर 2021 में उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट हुआ था और अंततः अप्रैल 2025 में वे पुनः इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस लौट आए थे। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: UP Vote List 2026: यूपी की अंतिम मतदाता सूची जारी; 2 करोड़ मतदाता घटे, प्रयागराज और लखनऊ में सबसे ज्यादा उछाल [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]