Sat, Jun 13th, 2026
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India News: DRDO की ऐतिहासिक सफलता; मिसाइल डिफेंस सिस्टम और ‘रुद्रम-II’ का सफल परीक्षण

by Tarun Bhardwaj • June 13, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने दुश्मन के अलग-अलग तरह के हवाई व मिसाइल खतरों के खिलाफ देश की रक्षा क्षमताओं को अभेद्य बनाने वाली कई अहम स्वदेशी तकनीकों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

लंबी दूरी की खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी पर एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ भारत की ‘मल्टी-लेयर्ड डिफेंस’ (बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली) का प्रदर्शन करने के लिए 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन सफल फ्लाइट टेस्ट किए गए। इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा और शक्तिशाली देशों की विशिष्ट श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) यानी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों तक को हवा में मार गिराने की अचूक बीएमडी (BMD) प्रणाली मौजूद है।

लगातार तीन परीक्षण

DRDO द्वारा किए गए इन लगातार परीक्षणों में भारत की मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) क्षमता का शक्ति प्रदर्शन पूरी तरह सफल रहा। रक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किए गए इंटरसेप्टर्स ने अपने-अपने तय लक्ष्यों को आसमान में ही सफलतापूर्वक नेस्तनाबूद कर दिया। डीआरडीओ के मुताबिक, इन आधुनिक डिफेंस प्रणालियों को भविष्य में मिसाइलों से जुड़े किसी भी नए और अत्याधुनिक खतरों का मुकाबला करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

इसके साथ ही, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NSM-MR) का भी पहला फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसने भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। इन सभी फ्लाइट टेस्ट को डीआरडीओ और भारतीय रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अंजाम दिया गया।

‘मिशन सुदर्शन चक्र’ बनेगा देश का सुरक्षा कवच

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को इस शानदार और युगांतकारी सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि “DRDO ने दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों के खिलाफ देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। मध्यम दूरी पर लंबी दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का प्रदर्शन करने के लिए लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण किए गए।

मल्टी-लेयर्ड BMD क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया। इंटरसेप्टर्स ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इन सिस्टम्स को मिसाइल से जुड़े नए खतरों से निपटने के लिए लेटेस्ट तकनीकों के साथ डिज़ाइन और विकसित किया गया है। इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है जिनके पास ICBM तक की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता (बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता) है। ‘नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज’ के पहले उड़ान परीक्षण के दौरान मध्यम दूरी पर एंटी-शिप डिफेंस का प्रदर्शन किया गया। इन अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए DRDO को बधाई।”

स्वदेशी ‘रुद्रम-II’ मिसाइल ने भी दिखाया दम

इस बड़ी सफलता के ठीक पहले डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना (IAF) ने वायु से सतह पर मार करने वाली देश की अत्याधुनिक रुद्रम-II (Rudram-II) मिसाइल का भी सफल उड़ान परीक्षण किया था। एक हवाई प्लेटफॉर्म (लड़ाकू विमान) से दागी गई इस मिसाइल ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ (टार्गेट ट्रेजेक्टरी) के तहत अपने पूर्वनिर्धारित लक्ष्य को अत्यंत सटीकता के साथ भेदा।

ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में तैनात अत्याधुनिक ट्रैकिंग, राडार और रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी निर्धारित तकनीकी उद्देश्य शत-प्रतिशत सफल रहे हैं। इस परीक्षण ने मिसाइल की अचूक सटीकता, उच्च विश्वसनीयता और उन्नत मारक क्षमताओं को पूरी तरह साबित कर दिया है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इन सभी परीक्षणों की कमान संभालते हुए पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखी और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के साथ-साथ इसमें सहयोग करने वाली भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के साझे प्रयासों की जमकर सराहना की।

आपको बता दें कि रुद्रम-II मिसाइल को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रमुख प्रयोगशाला ‘इमारत अनुसंधान केंद्र’ (RCI) द्वारा पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। इसके निर्माण और सफल विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL), शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ARDE) और एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) जैसी देश की शीर्ष लैब्स ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस सफलता से देश की सैन्य आत्मनिर्भरता को एक नई ऊंचाई मिली है।

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