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India-Oman FTA: भारत-ओमान के बीच ऐतिहासिक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ पर लगी मुहर; 98% भारतीय उत्पादों को मिलेगी ‘ड्यूटी-फ्री’ एंट्री

by Tarun Bhardwaj • December 18, 2025
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यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत और ओमान ने अपने 70 वर्षों के राजनयिक संबंधों को एक नई आर्थिक ऊँचाई देते हुए गुरुवार को मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा के दौरान हुए इस समझौते से भारत के कपड़ा, कृषि और चमड़ा जैसे प्रमुख उद्योगों के लिए ओमान के बाजार के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे।

निर्यातकों के लिए बड़ी राहत

यह समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) ऐसे समय में हुआ है जब भारत को अपने सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका में 50% तक के भारी आयात शुल्क (टैरिफ) का सामना करना पड़ रहा है। इस FTA के तहत, भारत के 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान के बाजार में बिना किसी शुल्क (Duty-Free) के पहुंच मिलेगी। विशेष रूप से भारतीय औद्योगिक सामान, जो वर्तमान में ओमान में 5% शुल्क पर प्रवेश करते हैं, अब अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।

क्या सस्ता होगा और किसे मिलेगा फायदा?

कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है। भारत ने भी ओमान से आने वाले खजूर, मार्बल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती करने पर सहमति जताई है। यह करार अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही से लागू होने की संभावना है।

रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक आंकड़े

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ की बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को $10.613 अरब (FY 2024-25) से आगे ले जाने पर सहमति बनी। वर्तमान में ओमान में 6,000 से अधिक भारत-ओमान संयुक्त उद्यम कार्यरत हैं, जो दोनों देशों के गहरे आर्थिक जुड़ाव को दर्शाते हैं। पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और सुल्तान हैथम बिन तारिक के नेतृत्व में यह सभ्यतागत रिश्ता अब “गहरे आर्थिक सहयोग के नए अध्याय” में तब्दील हो रहा है।

हालांकि द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन वर्तमान में व्यापार संतुलन ओमान के पक्ष में है। वित्त वर्ष 2024-25 में व्यापार घाटा बढ़कर 2.48 अरब डॉलर हो गया है। जीटीआरआई (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए व्यापक आर्थिक समझौते (CEPA) से भारत का औद्योगिक निर्यात बढ़ेगा, जिससे इस व्यापार घाटे को पाटने में मदद मिलेगी।

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