Thu, Jun 25th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

India: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; सेना में नहीं चलेगा पुरुषों का एकाधिकार, महिला अधिकारियों को मिलेगा परमानेंट कमीशन

by Tarun Bhardwaj • March 24, 2026
Women Officers to Receive Permanent Commission

India: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; सेना में नहीं चलेगा पुरुषों का एकाधिकार, महिला अधिकारियों को मिलेगा परमानेंट कमीशन

इस खबर को सुनें • हिंदी

00:00
00:00
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक युगांतरकारी फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों (अनुच्छेद 142) का प्रयोग करते हुए उन शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) महिला अधिकारियों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें स्थायी कमीशन (PC) देने से वंचित रखा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सेना में अब “पुरुषों का एकाधिकार” नहीं चलेगा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले “प्रणालीगत भेदभाव” (Systemic Discrimination) को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पेंशन और सेवा का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक ‘वन-टाइम मेजर’ के रूप में उन महिला अधिकारियों के पक्ष में बड़ा आदेश जारी किया है, जिन्होंने अपनी सेवा से हटाए जाने को चुनौती दी थी; इसके तहत उन्हें अब 20 साल की सेवा के बराबर माना जाएगा, जिससे वे कानूनी कार्यवाही के दौरान सेवामुक्त होने के बावजूद पूरी पेंशन और रिटायरमेंट लाभ पाने की हकदार होंगी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें पिछले समय का बकाया वेतन यानी एरियर नहीं दिया जाएगा और यह विशिष्ट आदेश JAG (जज एडवोकेट जनरल) व AEC (आर्मी एजुकेशन कोर) कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने सेना की चयन प्रक्रिया में “प्रणालीगत भेदभाव” पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि महिला अधिकारियों को गलत तरीके से लंबे करियर के लिए ‘अनफिट’ मानकर उनकी योग्यता और प्रगति को प्रभावित किया गया है; साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि पुरुष अधिकारी सभी खाली पदों पर अपने एकाधिकार की उम्मीद न करें और भविष्य में पूर्ण निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सैन्य प्रशासन को कट-ऑफ व चयन के मौजूदा तरीकों की दोबारा समीक्षा करने का आदेश दिया है।

क्या था विवाद?

यह पूरा मामला आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के जुलाई 2024 के उस आदेश के खिलाफ था, जिसमें महिला SSC अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से मना कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं में वे महिला अधिकारी भी शामिल थीं जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाइयों का हिस्सा रही थीं। महिला अधिकारियों का आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार और सेना ने स्थायी कमीशन देने में उनके साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: दिल्ली विधानसभा, मेट्रो स्टेशन और स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को बम से उड़ाने की धमकी; राजधानी में हाई अलर्ट

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.

मांट विधायक राजेश चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश महामंत्री घोषित 33°C गर्मी में ‘हुडी’ पहनने की एक भूल ने खोला मर्डर का राज यूपी बीजेपी के नए संगठन की आधिकारिक सूची जारी Maruti Brezza का नया Facelift मॉडल जल्द होगा लांच क्रिकेटर आकाश दीप ने अक्षिता राज संग रचाई शादी वेनेजुएला में हाई तीव्रता के दोहरे भूकंपो से मची भारी तबाही आईटी और मेटल शेयरों में भारी बिकवाली से सेंसेक्स 893 अंक टूटा टीम इंडिया की जर्सी देख भावुक हुए वैभव सूर्यवंशी