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किशाऊ बांध परियोजना को मिली हरी झंडी; अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

by Tarun Bhardwaj • September 15, 2026
Kishau Dam project gets the green light

किशाऊ बांध परियोजना को मिली हरी झंडी; अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

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यूनिक समय, नई दिल्ली। ऊपरी यमुना बेसिन में लंबे समय से लंबित 660 मेगावाट क्षमता की महत्वाकांक्षी ‘किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट’ (Kishau Multipurpose Dam Project) को लेकर मंगलवार को दिल्ली में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना यमुना नदी को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ छह राज्यों में जल संरक्षण, पेयजल और बिजली उत्पादन की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

राज्यों के बीच सुलझा पानी और लागत का विवाद

बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में फंडिंग और जल बंटवारे के फार्मूले को अंतिम रूप दिया गया। प्रोजेक्ट के जल घटक (Water Component) की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता के रूप में वहन की जाएगी।

वहीं शेष 10 प्रतिशत लागत छह लाभार्थी राज्यों द्वारा आपस में बांटी जाएगी। हिमाचल प्रदेश के हिस्से का आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान बिजली उत्पादन वाले हिस्से में हिमाचल प्रदेश की लागत का खर्च आपस में वहन करेंगे।

राज्यों को मिलेगा अतिरिक्त पानी

उत्तराखंड में यमुना की प्रमुख सहायक टोंस नदी पर इस जलाशय का निर्माण किया जाएगा। इस जलाशय की कुल जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी।इससे संबंधित राज्यों को तय अनुपात में अतिरिक्त पानी प्राप्त होगा।

योजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक और उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक पानी मिलेगा। इसके अलावा राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक अतिरिक्त पानी की आपूर्ति की जाएगी।

यमुना के पुनरुद्धार और बिजली उत्पादन को मिलेगी नई दिशा

प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य किशाऊ रिजर्वॉयर से नियंत्रित तरीके से पानी छोड़कर यमुना नदी में निरंतर और स्वच्छ जल का प्रवाह बनाए रखना है। 660 मेगावाट जल-विद्युत उत्पादन के साथ यह प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर और पड़ोसी राज्यों में पीने के पानी व सिंचाई की किल्लत को हमेशा के लिए समाप्त करने में मददगार होगा। अंतर-राज्यीय सहमति बनने के बाद अब इस बहुउद्देशीय परियोजना को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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