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Mathura News: बांके बिहारी कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; हाई पावर्ड कमेटी में शामिल होंगे 4 सेवायत गोस्वामी

by Tarun Bhardwaj • May 27, 2026
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यूनिक समय, वृंदावन (मथुरा। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और लाइव दर्शन परियोजना को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक बेहद अहम और ऐतिहासिक सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं और सेवाधिकारियों के हितों की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित हाई पावर्ड कमेटी में सेवायत गोस्वामी समाज के 4 प्रमुख प्रतिनिधियों को तुरंत शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि राजभोग सेवा से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी, जबकि शयन भोग सेवा से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी को इस उच्चस्तरीय समिति का सदस्य बनाया जाए। कोर्ट ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि सेवायत गोस्वामी समाज मंदिर की परंपराओं और धार्मिक व्यवस्थाओं को सबसे बेहतर तरीके से समझता है, इसलिए कॉरिडोर के मास्टर प्लान और भीड़ प्रबंधन में उनकी राय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

याचिका संख्या 001228/2025

दरअसल, बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश पर एक हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था। इस समिति में स्थानीय सेवाधिकारियों का उचित प्रतिनिधित्व न होने और मंदिर की प्राचीन व्यवस्थाओं में बदलाव किए जाने के खिलाफ पूर्व प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका संख्या 001228/2025 दाखिल की थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत के सम्मुख दलील दी कि यह मंदिर 400 साल से भी अधिक पुराना है। इसकी ऐतिहासिक परंपरा, दैनिक सेवा-पूजा, राग-भोग, दर्शन का समय आदि अपरिवर्तित और ऐतिहासिक हैं। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी ने दैनिक चर्या, देहरी पूजन, भोग समय, विश्राम काल और गर्मियों में होने वाली पारंपरिक ‘फूल बंगलों की सेवा’ में प्रशासनिक कारण बताकर बेवजह बदलाव कर दिए हैं, जिससे ठाकुरजी के सेवाधिकारियों और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है।

‘लाख रुपये फीस और हैलोजन लाइट लगाना गलत’

सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कोर्ट के सामने मंदिर के भीतर प्रशासनिक हस्तक्षेप की परतें खोलते हुए कहा कि कमेटी द्वारा पारंपरिक फूलबंगलों की सेवा के लिए एक लाख रुपये का भारी-भरकम शुल्क तय करना और लाइव टेलीकास्ट के नाम पर ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के ठीक सम्मुख तेज हैलोजन लाइटें लगाना पूरी तरह शास्त्र विरुद्ध है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ठाकुर जी की सेवा यहाँ ‘बाल रूप’ में होती है और उन पर तेज लाइटों का फोकस करना उनकी सेवा पद्धति को चोट पहुंचाता है।

इस पर संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उत्तर प्रदेश सरकार और कमेटी को निर्देश दिए कि वे गोस्वामी समाज के साथ बैठकर इन संवेदनशील सुझावों पर गंभीरता से विचार करें। सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वस्त किया कि कमेटी जल्द ही सेवाधिकारियों के साथ बैठक कर उनके सुझावों को समाहित करेगी।

यूपी सरकार तैयार करेगी वर्ल्ड क्लास मास्टर प्लान

सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को वृंदावन और बांके बिहारी मंदिर परिसर के अंदर व आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए एक बेहद ठोस और आधुनिक डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) शीघ्र तैयार कर अमल में लाने का आग्रह किया है। कोर्ट ने मंदिर की ओर जाने वाली संकरी और तंग गलियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में पारंपरिक ढंग से इतनी भारी भीड़ को संभालना मुमकिन नहीं है और यह सुरक्षा को लेकर एक गंभीर प्रश्न है।

न्यायालय ने निर्देश दिया कि आधुनिक तकनीक की सहायता से भीड़ को होल्डिंग एरिया (समुचित स्थानों) पर रोक-रोक कर, उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं देते हुए दर्शन कराने के इंतजाम किए जाएं। इस मास्टर प्लान में सड़कों का चौड़ीकरण, सड़कों से व्यावसायिक अतिक्रमण हटाना, पीने का साफ पानी, रेस्ट रूम, वेटिंग एरिया, आधुनिक अस्पताल, आपातकालीन निकास और बुजुर्गों के लिए ई-रिक्शा या बैटरी चालित वाहनों के विशेष इंतजाम शामिल करने को कहा गया है।

मंदिर कोष के पैसे और जमीनों की डीड पर विवरण

भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर एएसजी के.एम. नटराज ने देश की सबसे बड़ी अदालत को अवगत कराया कि कॉरिडोर निर्माण के लिए जमीन खरीदने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है और अब तक कुल 14 सेल डीड (बैनामे) सफलतापूर्वक निष्पादित हो चुके हैं। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि वर्तमान में जमीनों के मुआवजे और खरीद का भुगतान मंदिर के सुरक्षित कोष (फंड) से ही किया जा रहा है। हालांकि, एएसजी ने साफ किया कि यदि माननीय न्यायालय का ऐसा आदेश होगा, तो उत्तर प्रदेश सरकार उस पूरी धनराशि को वापस मंदिर कोष में सरकारी खजाने से जमा कर देगी।

लाइव स्ट्रीमिंग के नाम पर क्यूआर कोड पर खड़े हुए बड़े सवाल

सुनवाई का एक और सबसे संवेदनशील पहलू बांके बिहारी जी के लाइव दर्शनों के व्यवसायीकरण से जुड़ा रहा। आवेदक ‘लोक कल्याण मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक और प्रख्यात वरिष्ठ पत्रकार अनिल गुप्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने लाइव दर्शन स्क्रीन पर दिखाए जा रहे रियल एस्टेट विज्ञापनों और ऑनलाइन दान व्यवस्था पर गंभीर संवैधानिक सवाल उठाए।

अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने अदालत में कहा “यह मामला केवल लाइव स्ट्रीमिंग का नहीं है, बल्कि करोड़ों भक्तों की अगाध आस्था, पब्लिक ट्रस्ट की पारदर्शिता और न्यायालय द्वारा बनाई गई समिति की जवाबदेही से जुड़ा एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न है। कमेटी ने खुद माना है कि लाइव स्क्रीन पर ऑनलाइन दान के लिए क्यूआर कोड लगाए गए हैं, लेकिन यह कहीं स्पष्ट नहीं है कि यह पैसा किस बैंक खाते में जा रहा है? इसका ऑडिट कौन कर रहा है? जब सार्वजनिक आस्था डिजिटल माध्यम से सीधे धन में परिवर्तित हो रही है, तब बैंक ट्रेल, यूपीआई विवरण और लेखापरीक्षा (ऑडिट) अभिलेखों को जनता और अदालत से छिपाया नहीं जा सकता।”

अधिवक्ता ने स्क्रीन पर रियल एस्टेट के व्यावसायिक विज्ञापन दिखाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि यह सब कमेटी की अनुमति से हुआ तो उनका हलफनामा भ्रामक है, और यदि बिना अनुमति के व्यावसायिक विज्ञापन चले तो कमेटी अपने सुपरवाइइजरी दायित्व में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि आराध्य ठाकुर बांके बिहारी जी के दिव्य दर्शनों को किसी कमर्शियल स्क्रीन में तब्दील करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी वित्तीय और डिजिटल पहलुओं को भी गंभीरता से दर्ज करते हुए कमेटी से अगली रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

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