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Middle East War: ईरान ने सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन से किये भीषण हमले

by Tarun Bhardwaj • March 19, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध अब अपने 20वें दिन एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल और अमेरिका की चेतावनियों से बेखौफ ईरान ने अब “आर्थिक युद्ध” का रास्ता अपनाते हुए खाड़ी देशों (Gulf Countries) के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन से प्रचंड हमले किए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है।

ईरान का पलटवार

यह हमला तब हुआ जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘नरक दिखा देने’ और उसके गैस क्षेत्रों को ‘पूरी तरह तबाह’ करने की चेतावनी दी थी। दरअसल, ईरान अपने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हुए इजरायली हमले और अपने शीर्ष नेताओं की हत्याओं से तिलमिलाया हुआ है। डरने के बजाय ईरान और आक्रामक हो गया है और उसने पूरे खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर चोट की है।

ईरान की मिसाइलों और ड्रोन्स ने खाड़ी देशों के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाते हुए भारी तबाही मचाई है, जिसमें सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको की SAMREF और रास तनुरा रिफाइनरी पर भीषण हमले के बाद आग लग गई।

वहीं, कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG केंद्र और कुवैत की मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर भी जबरदस्त हमले किए गए, जिससे वहां ऊंची लपटें उठती देखी गईं। साथ ही, UAE के अबू धाबी स्थित रुवैस रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमलों के कारण सुरक्षा के लिहाज से वहां कामकाज रोकना पड़ा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया काला साया

विशेषज्ञों के अनुसार, इन हमलों का सीधा असर एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। चूंकि कतर और सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आपूर्तिकर्ता हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और LNG की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।

कतर का कड़ा रुख

हमलों के बाद कतर ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला करार दिया है। कतर सरकार ने ईरानी सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अगर कतर के गैस प्रतिष्ठानों पर दोबारा हमला हुआ, तो इसका “करारा जवाब” दिया जाएगा। राहत की बात यह रही कि इन हमलों में अब तक किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन अरबों डॉलर की संपत्ति जलकर राख हो गई है।

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