यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी भीषण जंग के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों और तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इजरायली सैन्य अधिकारियों ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि ईरान की शक्तिशाली IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) नेवी के चीफ अलीरेज़ा तंगसिरी (Alireza Tangsiri) एक सटीक स्ट्राइक में मारे गए हैं। इजरायल के मुताबिक, यह हमला ईरान के रणनीतिक बंदरगाह बंदर अब्बास (Bandar Abbas) पर किया गया, जहाँ तंगसिरी मौजूद थे। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक अपने नौसेना प्रमुख की मौत या इस हमले पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। कौन थे तंगसिरी? अगस्त 2018 से ईरानी नौसेना की कमान संभाल रहे अलीरेज़ा तंगसिरी को ईरान की समुद्री ताकत का चेहरा माना जाता था। इजरायली अफसरों का आरोप है कि तंगसिरी ही वह शख्स थे जिन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की हालिया नाकेबंदी की योजना बनाई और उसे लागू किया। हाल के हफ्तों में उन्होंने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले की खुली धमकी दी थी और विदेशी नागरिकों को उन क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी जारी की थी। उनके नेतृत्व में ईरानी नौसेना ने हॉर्मुज मार्ग पर पहरा कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति संकट गहरा गया था। हॉर्मुज स्ट्रेट हॉर्मुज जलडमरूमध्य विश्व का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक समुद्री रास्ता है। यह उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व यूएई के बीच स्थित है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। वर्तमान युद्ध के दौरान ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद कर रखा है और केवल गिने-चुने 'मित्र देशों' (जैसे भारत और चीन) को ही कड़ी शर्तों के साथ निकलने की अनुमति दी जा रही है। तंगसिरी की मौत के वैश्विक मायने इजरायली सैन्य अधिकारियों के इस दावे ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि IRGC नेवी चीफ अलीरेज़ा तंगसिरी की मौत की पुष्टि होने पर ईरान की ओर से भीषण जवाबी कार्रवाई की आशंका है, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह युद्ध क्षेत्र में बदल सकता है। इस समुद्री मार्ग की संभावित नाकेबंदी का सीधा अर्थ होगा दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल, जो भारत, चीन और जापान जैसे बड़े तेल आयातक देशों के सामने एक गहरा ऊर्जा संकट खड़ा कर देगा। ईंधन की इस किल्लत और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी से न केवल ग्लोबल सप्लाई चेन ठप होने का खतरा है, बल्कि दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम भी अनियंत्रित हो जाएंगे, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई के एक भयानक दौर में फंस सकती है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: UP News: फ्यूल संकट की अफवाहों पर सीएम योगी का कड़ा संदेश; बोले “मानसिक रूप से तैयार रहे” [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]