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Monalisa At 16: ‘मोनालिसा’ निकली नाबालिग; फरमान खान पर POCSO और एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR दर्ज

by Tarun Bhardwaj • April 10, 2026
'Monalisa' Turns Out to Be a Minor

Monalisa At 16: ‘मोनालिसा’ निकली नाबालिग; फरमान खान पर POCSO और एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR दर्ज

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यूनिक समय, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले और फरमान खान के विवाह मामले में एक सनसनीखेज मोड़ आया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में यह आधिकारिक रूप से सिद्ध हो गया है कि विवाह के समय मोनालिसा नाबालिग थी। इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाने में फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और एट्रोसिटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

72 घंटे की जांच

NCST के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश तक गहन छानबीन की। जांच टीम ने महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले, जहाँ पाया गया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। 11 मार्च 2026 को केरल में हुए विवाह के समय उसकी वास्तविक उम्र महज 16 साल 2 महीने और 12 दिन थी। जांच में खुलासा हुआ कि महेश्वर नगरपालिका से गलत जन्म तिथि (1/1/2008) के आधार पर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया था ताकि उसे बालिग दिखाया जा सके। आयोग ने इस फर्जी प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।

केरल कनेक्शन और PFI की भूमिका पर सवाल

अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग के समक्ष इस मामले को उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि इस विवाह में केरल के CPI-M नेताओं की सक्रिय भागीदारी थी। अधिवक्ता ने दावा किया कि PFI जैसे संगठनों ने ‘लव जिहाद’ के अस्तित्व को नकारने और एक “फॉल्स नैरेटिव” सेट करने के लिए रणनीतिक रूप से इस विवाह को बढ़ावा दिया। पारधी जनजाति की नाबालिग बेटी के विवाह पंजीकरण में बरती गई लापरवाही ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध बना दिया है।

आरोपी फरमान पर कानूनी शिकंजा

प्रशासन ने आयोग की अनुशंसा पर फरमान खान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। चूंकि पीड़िता पारधी जनजाति समुदाय से है, इसलिए उन पर अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। साजिश रचने और नाबालिग से अवैध विवाह के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

तलब किए गए दोनों राज्यों के DGP

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। केरल और मध्य प्रदेश के DGP को आयोग के नई दिल्ली मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है। आयोग ने 3 दिनों के भीतर इस केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है और पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी की जा रही है।

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