Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

NCERT Book Controversy: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख; CJI बोले “दोषियों को सजा मिलकर रहेगी”

by Tarun Bhardwaj • February 26, 2026
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। स्कूली किताबों के जरिए देश की न्यायपालिका की छवि धूमिल करने के प्रयास पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी के साथ-साथ सख्त तेवर दिखाए हैं। कक्षा 8 की नई NCERT पुस्तक में न्यायपालिका को ‘भ्रष्ट’ बताए जाने वाले कंटेंट पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इसे एक “सोचा-समझा और कैलकुलेटेड मूव” करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांग लेने से यह केस बंद नहीं होगा, बल्कि इस “गहरी साजिश” की जड़ तक जाकर जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाएगी।

अदालत की सख्त टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान बेंच ने इस विवादित कंटेंट के दूरगामी प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे बच्चों के दिमाग में जहर घोलने जैसा बताया। साजिश का अंदेशा जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक सुनियोजित कोशिश लगती है जिसमें पहले शिक्षकों को न्यायपालिका के भ्रष्ट होने का संदेश दिया जाएगा जो बाद में छात्रों और उनके अभिभावकों तक पहुँचकर देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा सकता है।

डिजिटल प्रसार के खतरे को लेकर वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने अदालत में स्पष्ट किया कि भले ही बाजार से 32 हार्ड कॉपियां वापस ले ली गई हों, लेकिन आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर घूम रहे पीडीएफ और ऑनलाइन सर्कुलेशन को रोकना लगभग नामुमकिन है। साथ ही कोर्ट इस बात पर भी बेहद हैरान नजर आया कि जब इस गंभीर विषय पर रजिस्ट्रार जनरल ने सवाल पूछे, तो यूजीसी और संबंधित अथॉरिटी ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उस विवादित कंटेंट का बचाव करने की कोशिश की, जिसे अदालत ने संस्थान की गरिमा के खिलाफ माना।

“बिना शर्त माफी और कार्रवाई का भरोसा”

NCERT की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष संस्थान की ओर से बिना शर्त माफी मांगते हुए यह स्पष्ट किया कि इस विवादित कंटेंट को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता है और सरकार पूरी तरह से संस्थान की गरिमा के साथ खड़ी है।

उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस आपत्तिजनक चैप्टर को तैयार करने वाले दोनों लेखकों पर भविष्य के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है और वे अब कभी भी यूजीसी या किसी मंत्रालय के साथ काम नहीं कर सकेंगे।

इसके साथ ही एसजी ने यह भी जानकारी दी कि बाजार में जा चुकी किताबों की सभी प्रतियों को वापस ले लिया गया है और अब पूरी पुस्तक की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।

CJI ने कहा— संविधान निर्माताओं के भरोसे का अपमान

मुख्य न्यायाधीश ने संविधान की मर्यादा का हवाला देते हुए कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं। उन्होंने उस मीडिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें फरवरी 2026 में प्रकाशित किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड’ के विवादित अंशों को उजागर किया गया था। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि एक पूर्व CJI के भाषण को संदर्भ से काटकर (Out of Context) यह दिखाने की कोशिश की गई कि न्यायपालिका ने खुद अपना भ्रष्टाचार स्वीकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बंद करने से इनकार कर दिया है। रजिस्ट्रार जनरल इस पूरे प्रकरण की जांच करेंगे कि यह विवादित कंटेंट छपने की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था। कोर्ट ने साफ किया कि संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: VIROSH;s Royal Wedding: उदयपुर के ITC एकाया में आज सात फेरे लेंगे विजय और रश्मिका; ‘प्राइमल’ थीम के साथ करेंगे शादी

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.